भारत में शी जिनपिंग की कार पर क्यों था काला कवर ? सुरक्षा और रहस्य का क्या है कनेक्शन
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दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। हालांकि, उनके पहुंचने से पहले शहर की सड़कों पर उनकी आधिकारिक कार को एक काले कवर से ढककर ले जाए जाने के वीडियो ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए।

क्या था कार को ढकने का असली मकसद? सोशल मीडिया पर वायरल हुए फुटेज में शी जिनपिंग की आधिकारिक लिमोजीन को काले रंग के सुरक्षात्मक कवर में ढका देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई असाधारण सुरक्षा खतरा नहीं, बल्कि एक मानक लॉजिस्टिक प्रोटोकॉल है। इस कवर का मुख्य उद्देश्य कार को परिवहन के दौरान धूल, बाहरी मौसम और संभावित खरोंच या नुकसान से बचाना होता है। इसके अलावा, अत्यधिक गोपनीय और हाई-टेक सरकारी वाहनों को सार्वजनिक नजरों से दूर रखना भी इसका हिस्सा है।

इस्तेमाल से पहले हटा लिया गया कवर दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही शी जिनपिंग दिल्ली पहुंचे, उनकी आधिकारिक कार से वह काला कवर हटा दिया गया। राष्ट्रपति के काफिले में यह गाड़ी पूरी तरह सामान्य स्थिति में नजर आई। यह साफ है कि कवर केवल वाहन के ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उपयोग के लिए नहीं। चीन के राष्ट्रपति के लिए यह कोई नई बात नहीं है; उनकी पिछली मलेशिया यात्रा के दौरान भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आई थीं।

कौन सी है जिनपिंग की अभेद कार? शी जिनपिंग जिस कार का उपयोग करते हैं, वह Hongqi N701 मॉडल है। इसे चीन की FAW कंपनी द्वारा विशेष रूप से राष्ट्रपति के लिए तैयार किया गया है। 1958 से ही Hongqi ब्रांड चीन के शीर्ष नेतृत्व की पहचान रहा है। विदेश दौरों पर भी चीन दूसरे देशों की कारों के बजाय अपने देश में बनी इसी अल्ट्रा-सिक्योर लिमोजीन को ले जाना पसंद करता है, जो उनकी सॉफ्ट पावर का भी प्रतीक है।

ताज होटल में डेरा, साथ आए 400 लोग शी जिनपिंग के इस दौरे के लिए सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम हैं। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति नई दिल्ली के ताज होटल की पांचवीं मंजिल पर रुकेंगे। उनके साथ चीन से करीब 400 लोगों का एक बड़ा काफिला भारत पहुंचा है, जिसमें उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं।

सात साल बाद भारत की जमीन पर जिनपिंग यह दौरा भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। करीब सात साल के अंतराल के बाद शी जिनपिंग का यह भारत आगमन ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से रिश्तों में तनाव रहा है। 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में उनकी उपस्थिति और द्विपक्षीय चर्चाओं पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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