क्या जिंदा है ओसामा का बेटा हमजा? 9/11 की 25वीं बरसी पर अल-कायदा के वीडियो ने छेड़ी नई बहस
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हमजा की वापसी या पुराना प्रॉपेगैंडा? 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर अल-कायदा ने एक नया प्रोपेगेंडा वीडियो जारी किया है। संगठन की मीडिया विंग अस-सहाब द्वारा जारी 50 मिनट के इस वीडियो ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के बीच खलबली मचा दी है। वीडियो में ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन की ऐसी फुटेज दिखाई गई है, जिसे पहले कभी सार्वजनिक नहीं किया गया था।

2019 में हुई थी मौत की पुष्टि हमजा बिन लादेन को लंबे समय से ओसामा का उत्तराधिकारी माना जाता था। अगस्त 2019 में अमेरिकी काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन के दौरान उसे मार गिराने की खबरें सामने आई थीं, जिसकी पुष्टि बाद में अमेरिकी सरकार ने भी कर दी थी। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि अल-कायदा ने आज तक अपने इस प्रमुख नेता की मौत को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया और न ही कोई शोक संदेश जारी किया।

वीडियो में क्या है खास? वीडियो का शीर्षक A Quarter Century of the 11 September Raids रखा गया है। इसमें हमजा को सफेद पगड़ी पहने और बगल में असॉल्ट राइफल रखे हुए दिखाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फुटेज जानबूझकर ओसामा बिन लादेन की पुरानी तस्वीरों की तरह डिजाइन की गई है। इसका मकसद हमजा को अपने पिता की विरासत के प्रतीक के तौर पर पेश करना है।

पुराने फुटेज का इस्तेमाल तो नहीं? वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमजा सच में जिंदा है? सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह वीडियो पुराना भी हो सकता है। वीडियो में दिखाई गई फुटेज की तारीख प्रमाणित नहीं है। अल-कायदा अक्सर पुराने वीडियो को समय-समय पर जारी कर अपनी ताकत दिखाने का भ्रम पैदा करता है। 2024 और 2025 में भी उसके जिंदा होने की अटकलें लगी थीं, लेकिन उनकी पुष्टि कभी नहीं हो सकी।

अल-कायदा के पीछे की असली रणनीति विशेषज्ञों के मुताबिक, इस वीडियो का मुख्य उद्देश्य केवल हमजा की मौजूदगी जताना नहीं है, बल्कि बिन लादेन ब्रांड को जीवित रखना है। अल-कायदा के कमजोर होते प्रभाव के बीच, वे हमजा के चेहरे का इस्तेमाल अपने कैडर को एकजुट करने और युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने के लिए कर रहे हैं। यह वीडियो सीधे तौर पर संदेश देता है कि ओसामा बिन लादेन की विरासत अभी खत्म नहीं हुई है।

निष्कर्ष फिलहाल, यह वीडियो हमजा के जिंदा होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं देता है। यह एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक रणनीति है। भविष्य में सुरक्षा एजेंसियां इस फुटेज की टाइमलाइन की जांच करेंगी, लेकिन अभी के लिए इसे अल-कायदा का एक शक्ति प्रदर्शन और वैचारिक पुनरुत्थान की कोशिश ही माना जा रहा है।

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