बेंगलुरु के Fast Code AI के CEO अर्जुन जैन की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। साल 2001 में एक छात्र के तौर पर JEE की परीक्षा देने निकले अर्जुन घर से तो किसी वीआईपी की तरह निकले थे, लेकिन परीक्षा हॉल के अंदर उन्हें अपनी असलियत का सामना करना पड़ा।
अर्जुन उस समय भोपाल के डेली कॉलेज में छात्र थे। उनके दोस्त कुबेर के पिता तत्कालीन मध्य प्रदेश के गृह मंत्री थे। परीक्षा से एक रात पहले अर्जुन उनके सरकारी बंगले पर रुके। अगली सुबह जब वह परीक्षा केंद्र पहुंचे, तो उनके साथ लाल बत्ती वाली सरकारी गाड़ी और सुरक्षा गार्ड थे। बाहर पूरी तरह से रसूख का माहौल था, लेकिन परीक्षा हॉल के भीतर सब समान थे।
JEE प्रश्नपत्र देखते ही अर्जुन को समझ आ गया कि उनकी मेहनत रंग नहीं ला रही है। उन्होंने पिछले दो साल हॉकी और अन्य गतिविधियों को छोड़कर सिर्फ पढ़ाई की थी, लेकिन वे परीक्षा में असफल रहे। उस असफलता ने उन्हें यह सिखा दिया कि सुरक्षा और रसूख किसी भी परीक्षा में सफलता की गारंटी नहीं होते।
कोटा जाकर दोबारा तैयारी करने का विकल्प उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण बंद था। अर्जुन ने हार नहीं मानी और बेंगलुरु के RV College of Engineering में कंप्यूटर साइंस में दाखिला ले लिया। फर्स्ट ईयर में उन्होंने दोबारा JEE दी और 3363 रैंक के साथ IIT-BHU में सीट हासिल की, लेकिन उन्होंने वहां जाने के बजाय अपनी मौजूदा पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया।
समय का चक्र देखिए, जिस IIT में अर्जुन छात्र के तौर पर दाखिला नहीं ले सके थे, करीब 14 साल बाद उसी IIT बॉम्बे ने उन्हें कंप्यूटर विजन पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। 2016 से 2020 तक उन्होंने वहां प्रोफेसर के तौर पर सेवाएं दीं और कई छात्रों का मार्गदर्शन किया।
अर्जुन जैन की यह कहानी आज के छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है। उन्होंने साफ कहा है, JEE जैसी परीक्षाएं भले ही यह तय कर दें कि आपकी शुरुआत कहां से होगी, लेकिन वे यह कभी तय नहीं कर सकतीं कि आप जिंदगी में कहां पहुंचेंगे। उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो आप उस मंजिल तक भी पहुंच सकते हैं, जहाँ पहुंचने का सपना कभी अधूरा रह गया था।
*It is 2001. I arrive at my JEE Mains centre in a Home Minister s car. Lal batti flashing. An armed guard riding along, if I remember right. My classmate Kuber s father was the home minister of Madhya Pradesh. I have stayed the night at their Bhopal bungalow, and his mother… pic.twitter.com/XVkqki7Z9d
— Arjun Jain | Fast Code AI (@Arjunjain) September 11, 2026
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