मशहूर तमिल विद्वान और अभिनेता सोलोमन पाप्पैया का 90 की उम्र में निधन, शोक में डूबी फिल्म इंडस्ट्री
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तमिल साहित्य जगत और सिनेमा के लिए शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 एक दुखद दिन रहा। प्रसिद्ध तमिल विद्वान, बेहतरीन डिबेट मॉडरेटर और अभिनेता प्रोफेसर सोलोमन पाप्पैया का मदुरै में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।

पट्टी मंडरम की अनूठी पहचान सोलोमन पाप्पैया तमिलनाडु का एक ऐसा नाम थे, जो घर-घर में पहचाने जाते थे। टेलीविजन पर उनके द्वारा होस्ट किए जाने वाले पट्टी मंडरम (बहस मंच) को लोग बेहद पसंद करते थे। वे साहित्य की जटिल बातों को अपनी अद्भुत शैली और वाकपटुता से आम जनमानस के लिए सरल बना देते थे।

सिनेमाई सफर और रजनीकांत के साथ जुड़ाव भले ही वे एक विद्वान थे, लेकिन तमिल सिनेमा में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। शंकर निर्देशित फिल्म बॉयज और सुपरस्टार रजनीकांत की ब्लॉकबस्टर फिल्म शिवाजी: द बॉस में निभाए गए उनके किरदारों को प्रशंसक आज भी याद करते हैं। शिवाजी में थोंडाइमन की भूमिका ने उन्हें सिनेमाई पर्दे पर एक नई पहचान दी थी।

क्यों ठुकराए थे फिल्मों के 200 से अधिक ऑफर? क्या आप जानते हैं कि शिवाजी की अपार सफलता के बाद उन्हें फिल्मों के 200 से ज्यादा ऑफर मिले थे? 2022 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बहुत सम्मान मिला, लेकिन वे खुद को अभिनय की दुनिया के बजाय साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र के लिए अधिक उपयुक्त मानते थे, इसलिए उन्होंने सक्रिय अभिनय से दूरी बना ली।

दिग्गजों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि उनके निधन पर सुपरस्टार रजनीकांत ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, वे एक महान हस्ती थे, जिन्होंने पट्टी मंडरम को संभ्रांत वर्ग से निकाल कर आम लोगों तक पहुंचाया। वहीं, अभिनेता प्रभुदेवा ने सोशल मीडिया पर लिखा, तमिल भाषा की एक शानदार आवाज आज खामोश हो गई, उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। फिल्ममेकर जी. धनंजयन ने भी उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।

साहित्य और कला के लिए समर्पित जीवन सोलोमन पाप्पैया को उनके अमूल्य योगदान के लिए कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया था। उन्हें वर्ष 2000 में कलैमामणि पुरस्कार और 2010 में मुथमिल पेरारिग्नार की उपाधि मिली थी। वर्ष 2021 में उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उनका जाना तमिल संस्कृति के एक युग का अंत माना जा रहा है।

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