गरबा में गैर-मुस्लिमों की एंट्री पर छिड़ा नया विवाद, शहजाद पूनावाला ने पूछे तीखे सवाल
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नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में मुसलमानों की एंट्री को लेकर देश भर में बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अपनी राय रखते हुए इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताया है।

क्या हिंदू त्योहारों को सेक्युलर बनाने की कोशिश हो रही है?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए पूनावाला ने कहा कि आजकल एक नया चलन चल रहा है जिसमें हिंदुओं के त्योहारों को जबरन सेक्युलर बनाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हर धार्मिक आयोजन को सिर्फ एक पार्टी या इवेंट मान लेना सही है?

गरबा सिर्फ डांस नहीं, मां अंबा की आराधना है

पूनावाला ने गरबा की परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि यह शब्द संस्कृत से निकला है। यह केवल नृत्य या संगीत का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां अंबा की पूजा और आराधना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गरबा के धार्मिक स्वरूप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हज और उमराह का दिया उदाहरण

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने हज और उमराह का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह इस्लाम में कुछ धार्मिक स्थल और प्रक्रियाएं केवल मुस्लिमों के लिए हैं और वहां गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है, ठीक उसी तरह यदि कोई व्यक्ति मूर्ति पूजा में आस्था नहीं रखता, तो वह गरबा जैसी आराधना में हिस्सा लेने की जिद क्यों कर रहा है?

रहीम का राहुल बनना और सुरक्षा पर चिंता

पूनावाला ने पहचान छिपाकर गरबा में शामिल होने वाले लोगों पर भी निशाना साधा। उन्होंने रहीम के राहुल बनने का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग गलत मंशा से आयोजनों में घुसपैठ करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग महिलाओं को फंसाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों को एक जरिया मानते हैं।

हिंदू त्योहारों का इस्लामीकरण रोकना जरूरी

भाजपा प्रवक्ता ने तीखे लहजे में कहा कि दिवाली को जश्ने-ए-चिराग , होली को डांस पार्टी और गरबा को भी महज एक डांस इवेंट बताने की साजिश को रोकना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी की आस्था उस पूजा में नहीं है, तो उसे ऐसे आयोजनों से दूर ही रहना चाहिए।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में विश्व हिंदू परिषद (VHP) जैसे संगठनों ने भी मांग की है कि गरबा आयोजनों में प्रवेश से पहले आधार कार्ड की जांच अनिवार्य हो और केवल उन्हीं लोगों को आने दिया जाए जो उस धर्म के प्रति सम्मान रखते हैं।

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