नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ: 1 लाख नागा संन्यासियों का होगा जमावड़ा, 200 एकड़ में बसेगा साधु ग्राम
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महाराष्ट्र सरकार और मेला विकास प्राधिकरण ने आगामी सिंहस्थ कुंभ को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। त्र्यंबकेश्वर में पहली बार 200 एकड़ से अधिक जमीन पर एक विशाल साधु ग्राम बसाया जा रहा है, जो संतों और श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा।

अखाड़ों के लिए विशेष व्यवस्था अब तक कुंभ मेले के दौरान संन्यासी अखाड़ों को जगह की कमी से जूझना पड़ता था। कई बड़े संत और महामंडलेश्वर किराए के मकानों में रहने को मजबूर थे। इस बार सरकार ने सभी अखाड़ों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त जमीन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इससे संतों में भारी उत्साह है।

भव्य पंडाल होंगे आकर्षण देश के अन्य कुंभों की तरह नासिक में भी अखाड़ों के भव्य पंडाल देखने को मिलेंगे। प्रयागराज और हरिद्वार कुंभ में जूना और निरंजनी अखाड़ों के पंडाल अपनी भव्यता और करोड़ों रुपये की लागत के लिए चर्चा में रहे हैं। त्र्यंबकेश्वर में भी इसी स्तर के भव्य पंडालों का निर्माण किया जाएगा, जो मेले की रौनक को कई गुना बढ़ा देंगे।

1 लाख नागा संन्यासियों के आगमन की उम्मीद इस बार के कुंभ में 1 लाख से अधिक नागा संन्यासियों के पहुंचने की संभावना है। पहले के आयोजनों में त्र्यंबकेश्वर में नागा संन्यासियों की संख्या सीमित रहती थी, लेकिन साधु ग्राम के निर्माण से उनके रहने और साधना के लिए बेहतर स्थिति बनेगी। धूनी रमाते साधु और पारंपरिक वेशभूषा में नागा संन्यासी इस कुंभ का मुख्य आकर्षण होंगे।

शाही स्नान और इतिहास की झलक त्र्यंबकेश्वर में शाही स्नान का अपना ऐतिहासिक महत्व है। 1789-1790 के दौरान स्नान के अधिकारों को लेकर हुए विवाद के बाद, तत्कालीन मराठा पेशवा सवाई माधवराव ने शैव और वैष्णव संप्रदायों के लिए स्नान स्थल अलग-अलग कर दिए थे। तभी से संन्यासी अखाड़े त्र्यंबकेश्वर में शाही स्नान की अपनी परंपरा का पालन कर रहे हैं।

सुरक्षित और भव्य आयोजन का लक्ष्य मेला विकास प्राधिकरण ने साधु ग्राम में सुरक्षित और टिकाऊ निवास के लिए अलग-अलग विकल्पों की टेस्टिंग शुरू कर दी है। सरकार का उद्देश्य है कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सुव्यवस्था बनी रहे और त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ को पहले की तुलना में कहीं अधिक भव्य और व्यवस्थित स्वरूप दिया जा सके।

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