यूपी चुनाव 2027 की बिसात: सीएम योगी से क्यों मिलीं रिटायर्ड आईएएस आराधना शुक्ला और उनकी बेटी?
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही हलचल तेज हो गई है। हाल ही में लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से 1989 बैच की सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आराधना शुक्ला की मुलाकात ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। इस मुलाकात में उनकी बेटी और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता पौलोमी शुक्ला शर्मा भी मौजूद थीं।

कौन हैं आराधना शुक्ला? आराधना शुक्ला यूपी की ब्यूरोक्रेसी का एक बड़ा नाम रही हैं। वे माध्यमिक, उच्च शिक्षा और आयुष जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अपर मुख्य सचिव के पद पर तैनात रह चुकी हैं। योगी सरकार के दोनों कार्यकालों में उनकी भूमिका काफी प्रभावशाली रही है। उनकी बेटी पौलोमी शुक्ला फोर्ब्स 30 अंडर 30 सूची में शामिल रही हैं और अनाथ बच्चों के अधिकारों के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती हैं।

ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कवायद? राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट नहीं मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता लगभग 10-11% हैं, जो चुनाव में ओपिनियन मेकर की भूमिका निभाते हैं। राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा और राम मंदिर के सीईओ जितेंद्र मिश्र के बाद आराधना या पौलोमी शुक्ला का सक्रिय होना, बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह शिक्षित और प्रशासनिक बैकग्राउंड वाले ब्राह्मण चेहरों को अहमियत दे रही है।

क्या है बीजेपी का नया नैरेटिव ? 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद बीजेपी यूपी में अपना सामाजिक समीकरण फिर से दुरुस्त करने में जुटी है। अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले (जिसमें वे पंडित यानी ब्राह्मणों को भी जोड़ते हैं) की काट खोजने के लिए बीजेपी अब प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरों को आगे ला रही है।

राजनीति में पौलोमी शुक्ला की एंट्री? पौलोमी शुक्ला का मजबूत लीगल और सोशल प्रोफाइल बीजेपी के लिए एक बड़ा एसेट हो सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें बीजेपी किसी प्रबुद्ध प्रकोष्ठ, राज्य महिला आयोग या अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक मंच पर बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। वहीं, आराधना शुक्ला के प्रशासनिक अनुभव का लाभ सरकार किसी आयोग के जरिए ले सकती है।

आधिकारिक तौर पर भले ही इसे शिष्टाचार भेंट कहा गया हो, लेकिन 2027 चुनाव से पहले पावर कॉरिडोर में हो रही यह हलचल इशारा कर रही है कि बीजेपी यूपी में अपनी चुनावी रणनीति को नए सिरे से धार दे रही है। अब देखना यह होगा कि यह मुलाकात भविष्य में किस राजनीतिक करवट का आधार बनती है।

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