ब्रिक्स 2026: पीएम मोदी के न्योते पर दिल्ली आ रहे शी जिनपिंग, ड्रैगन के साथ बर्फ पिघलने का संकेत
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ग्लोबल पॉलिटिक्स में एक बड़ा हलचल भरा मोड़ आया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत निमंत्रण पर 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।

दो एशियाई महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं का एक ही मंच पर आना महज एक रूटीन दौरा नहीं है। इसे कूटनीतिक गलियारों में एक हाई-वोल्टेज ड्रामा और बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

गलवान के बाद जमी बर्फ पिघली

साल 2020 में गलवान घाटी के खूनी संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्ते पूरी तरह फ्रीज हो गए थे। पिछले 6-7 सालों से सैन्य तैनाती और कूटनीतिक दूरी ने दोनों देशों को आमने-सामने खड़ा कर दिया था।

हालांकि, पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा के बाद से बंद पड़े दरवाजे फिर खुले हैं। एलएसी (LAC) पर डिसइंगेजमेंट और गश्त को लेकर हुए समझौतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देश अब सीमा विवाद के स्थायी समाधान और व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं।

शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे के तीन बड़े कारण

जानकारों का मानना है कि इस दौरे के पीछे तीन प्रमुख रणनीतिक वजहें हैं:

अहम सवाल और उनके जवाब

1. यह दौरा ऐतिहासिक क्यों है? अक्टूबर 2019 के मामल्लापुरम शिखर सम्मेलन के बाद यह पहली बार है जब शी जिनपिंग भारतीय धरती पर आ रहे हैं। 2020 के तनाव के बाद रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में इसे सबसे बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।

2. क्या मोदी-शी के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी? जी हां, ब्रिक्स सम्मेलन से इतर 12 सितंबर को पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की प्रबल संभावना है, जिसमें सीमा सुरक्षा और व्यापार पर चर्चा होगी।

3. सम्मेलन में और कौन-कौन शामिल हो रहा है? इस सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन सहित विस्तारित ब्रिक्स देशों के प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस हिस्सा ले रहे हैं।

4. इस शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्या है? भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस समिट की थीम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता है। इसमें एआई, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, बहुपक्षवाद और ग्लोबल साउथ की भूमिका पर मुख्य रूप से मंथन होगा।

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