पुतिन के भारत आने से पहले नोएडा में हलचल: क्या है रूसी राष्ट्रपति की अभेद्य सुरक्षा का रहस्य?
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भारत की राजधानी नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। इस बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगमन से पहले ही एक बड़ी सुरक्षा हलचल देखने को मिली है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हाल ही में रूस के तीन सैन्य परिवहन विमानों की लैंडिंग ने सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

नोएडा एयरपोर्ट पर रूसी विमानों का डेरा नोएडा एयरपोर्ट पर पहली बार किसी विदेशी सैन्य विमान का उतरना एक बड़ा घटनाक्रम है। इन विमानों में आईएल-76 (IL-76) जैसे भारी-भरकम परिवहन विमान शामिल थे। माना जा रहा है कि इन विमानों के जरिए रूस की एक एडवांस टीम और उच्च-स्तरीय सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे हैं, जो पुतिन के आने से पहले सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की बारीकियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा और एडवांस टीम पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था सामान्य वीआईपी प्रोटोकॉल से काफी अलग और जटिल होती है। उनकी एडवांस टीम मेजबान देश के सुरक्षा बलों के साथ मिलकर होटल, कार्यक्रम स्थल और आने-जाने के रास्तों का सूक्ष्म विश्लेषण करती है। यह टीम पुतिन के आगमन से कई दिन पहले ही सक्रिय हो जाती है ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक की गुंजाइश न रहे।

भोजन से लेकर मेडिकल तक, सब कुछ साथ पुतिन की सुरक्षा का सबसे दिलचस्प पहलू उनके व्यक्तिगत संसाधन हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन केवल सुरक्षाकर्मियों पर ही निर्भर नहीं रहते, बल्कि वे अपने साथ अपना भोजन, पानी और यहां तक कि मेडिकल लैब जैसी सुविधाएं भी लेकर चलते हैं। माना जाता है कि उनके साथ विशेष शेफ और फूड टेस्टर्स की एक टीम रहती है, जो हर बार उनके भोजन की सुरक्षा जांच सुनिश्चित करती है।

क्या कचरा भी वापस ले जाती है रूसी टीम? पुतिन की सुरक्षा को लेकर कई दावे अक्सर चर्चा में रहते हैं। इनमें से एक चौंकाने वाला दावा यह है कि उनकी टीम राष्ट्रपति के इस्तेमाल के बाद छोड़े गए किसी भी तरह के कचरे (DNA साक्ष्य) को पीछे नहीं छोड़ती, बल्कि उसे वापस रूस ले जाया जाता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई है, लेकिन ये रूसी सुरक्षा के अत्यधिक सतर्क होने के प्रमाण माने जाते हैं।

तैयारियों का संदेश नोएडा एयरपोर्ट पर सैन्य विमानों का उतरना सिर्फ एक लॉजिस्टिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक कड़ा संदेश है। यह दर्शाता है कि पुतिन की सुरक्षा का मॉडल केवल उनके साथ चलने वाले अंगरक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी मशीनरी है जो उनके पहुंचने से बहुत पहले ही पूरे इलाके को रूसी सुरक्षा मानकों के दायरे में ले आती है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत आने वाले पुतिन की सुरक्षा पूरी दुनिया की निगाहों में रहेगी।

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