ट्रंप का चुनावी दांव: हर अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर बांटने का ऐलान, क्या जीत दिलवा पाएगा यह वादा?
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अमेरिका में मध्यावधि (मिड-टर्म) चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पार्टी रिपब्लिकन को जीत दिलाने के लिए एक बड़ा और चौंकाने वाला दांव चला है। डलास में आयोजित रिपब्लिकन सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने हर वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपये) का लाभांश देने का वादा किया है।

जीत की शर्त: क्या है ट्रंप का प्लान? ट्रंप ने इस घोषणा के साथ एक स्पष्ट शर्त भी जोड़ी है। उन्होंने कहा कि यह राशि तभी दी जाएगी, जब रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले चुनावों में प्रतिनिधि सभा (House) और सीनेट दोनों में जीत हासिल करेगी। ट्रंप का तर्क है कि उनके नेतृत्व में अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व वृद्धि की है और देश के पास पर्याप्त धन उपलब्ध है, जिसे जनता में बांटा जा सकता है।

क्या है ट्रंप अकाउंट्स योजना? यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने सीधे नकद लाभ देने की घोषणा की है। इससे पहले जुलाई में उन्होंने ट्रंप अकाउंट्स योजना का ऐलान किया था। इस योजना के तहत 2025 से 2028 के बीच पैदा होने वाले प्रत्येक अमेरिकी बच्चे के खाते में सरकार 1,000 डॉलर जमा करेगी। साथ ही, अभिभावकों को प्रति वर्ष इसमें 5,000 डॉलर तक अतिरिक्त जमा करने की सुविधा दी जाएगी। इससे पहले, सैन्य सेवा सदस्यों को भी 1,776 डॉलर का वॉरियर डिविडेंड देने की घोषणा की जा चुकी है।

आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता और खर्च का गणित ट्रंप की इस घोषणा से राजनीति गलियारों में बहस छिड़ गई है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में करीब 27 करोड़ वयस्क नागरिक हैं। यदि सभी को 5,000 डॉलर दिए जाते हैं, तो सरकार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। अभी तक राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस विशाल राशि का प्रबंध कहां से किया जाएगा या इसे लागू करने का रोडमैप क्या होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करने के लिए कांग्रेस से विशेष कानून पास कराना जरूरी होगा।

क्या लोकप्रियता में आ रही गिरावट है वजह? ईरान के साथ जारी तनाव, देश में बढ़ती महंगाई और तेल की बढ़ती कीमतों के चलते पिछले कुछ समय से राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट देखी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं को लुभाने के लिए यह सीधे आर्थिक लाभ का रेवड़ी कल्चर अपनाया गया है, ताकि मिड-टर्म चुनावों में अपनी खोई हुई साख को वापस पाया जा सके। अब देखना यह होगा कि अमेरिकी जनता इस लुभावने वादे पर कितना भरोसा करती है।

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