जादवपुर यूनिवर्सिटी में आजादी के नारे लगे तो होगा नेताजी वाला इलाज : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) को लेकर सख्त तेवर अपना लिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यूनिवर्सिटी परिसर में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गांधी की भाषा नहीं, नेताजी के तरीके से जवाब विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि जादवपुर यूनिवर्सिटी में कश्मीर मांगे आजादी या भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाए गए, तो सरकार चुप नहीं बैठेगी। अधिकारी ने कहा, हम महात्मा गांधी की भाषा में नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भाषा में जवाब देंगे। राष्ट्रविरोधी ताकतों का इलाज करना अब जरूरी हो गया है।

1,300 करोड़ का अनुदान, पर अनुशासन जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जादवपुर यूनिवर्सिटी को 1,300 करोड़ रुपये का भारी अनुदान दे रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि परिसर को राष्ट्रविरोधी एजेंडे का अड्डा बनने दिया जाए। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, जो लोग भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाएंगे, उनके खुद के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएंगे।

हिंसा और झड़पों पर सरकार सख्त गौरतलब है कि हाल के दिनों में जादवपुर यूनिवर्सिटी में वामपंथी छात्र संगठनों (SFI, DSO, DSF) और ABVP के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनिवर्सिटी में धमकाने की संस्कृति (Culture of Intimidation) को खत्म करने का समय आ गया है। उन्होंने पहले की सरकारों पर राज्य की परंपराओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।

धीरेंद्र शास्त्री का पुतला जलाने वालों पर कार्रवाई मुख्यमंत्री ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कोलकाता पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि विरोध प्रदर्शन के दौरान शास्त्री का पुतला फूंकने वाले प्रदर्शनकारियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

वंदे मातरम गाना अनिवार्य अधिकारी ने दो टूक कहा कि बंगाल में रहने वाले हर व्यक्ति को वंदे मातरम गाना होगा। उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले से जुड़े एक संशोधन विधेयक पर भी रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार की जवाबदेही से खुश नहीं हैं, वे अपनी नौकरी छोड़ सकते हैं।

इतिहास की जांच की तैयारी मुख्यमंत्री ने 1970 में जादवपुर यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति गोपाल सेन की हत्या का मुद्दा भी उठाया। सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि आवश्यक हुआ, तो इस पुरानी घटना की नए सिरे से जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी।

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