अमेरिका का डॉलर-फॉर-मिसाइल डॉक्ट्रिन: ईरान के 8 तेल टैंकर तबाह, 13,500 करोड़ का बड़ा नुकसान
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मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के जन्मदिन के दिन शुरू हुई सैन्य कार्रवाई अब एक बड़े युद्ध में बदलती दिख रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस टकराव ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है।

डॉलर-फॉर-मिसाइल डॉक्ट्रिन: अमेरिका की नई रणनीति

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक आक्रामक युद्ध सिद्धांत लागू किया है, जिसे डॉलर-फॉर-मिसाइल डॉक्ट्रिन कहा जा रहा है। इस नीति का सीधा सा अर्थ है: अगर ईरान अमेरिकी युद्धपोत पर एक मिसाइल दागेगा, तो अमेरिका उसके बदले में ईरान के अरबों डॉलर के आर्थिक संसाधनों, विशेषकर तेल टैंकरों को नष्ट कर देगा। यह रणनीति ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए तैयार की गई है।

8 टैंकरों का विनाश और ईरान को भारी चोट

पिछले 48 घंटों में अमेरिका ने फारस की खाड़ी और खर्ग द्वीप के पास ईरान के 8 महत्वपूर्ण तेल टैंकरों (जैसे एमटी काविज़, एमटी चारमीनार, एमटी डेर्या आदि) को निशाना बनाया है। एक सुपरटैंकर और उस पर लदे तेल की कुल कीमत लगभग 2,700 करोड़ रुपये होती है। इस तरह 8 टैंकरों के नष्ट होने से ईरान को करीब 13,500 करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। अमेरिका का तर्क है कि ईरान इन टैंकरों के जरिए शैडो फ्लीट चलाकर तेल बेचता है और उस पैसे से हूती, हिजबुल्लाह जैसे समूहों को हथियार मुहैया कराता है।

जॉर्डन में क्यों भड़के मिसाइल हमले?

ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जानकारों के मुताबिक, ईरान का जॉर्डन को निशाना बनाने के पीछे बड़ा कारण टावर 22 सैन्य चौकी है। यह चौकी सीरिया और लेबनान तक ईरान की रसद और हथियारों की आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा है। साथ ही, जॉर्डन से उड़ान भरने वाले अमेरिकी फाइटर जेट ईरान के लिए बड़ा खतरा हैं।

अमेरिकी ड्रोन का पकड़ा जाना

इस संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका का एक Dive-LD सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा है। यह एक मानवरहित अंडरवाटर व्हीकल (UUV) है, जिसका उपयोग जासूसी और समुद्री सुरंगों का पता लगाने के लिए किया जाता है। ईरान इस तकनीक को हासिल करना अपनी बड़ी सैन्य उपलब्धि बता रहा है और इसे रूस या चीन के साथ साझा करने की संभावना भी जताई जा रही है।

वैश्विक बाजार में तेल की आग

इस युद्ध का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। शिपिंग बीमा और माल ढुलाई के किराए में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातकों पर पड़ेगा, जहाँ ईंधन और जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आई 813 अंकों की भारी गिरावट भी इसी तनाव का नतीजा है, जिसमें निवेशकों के 3 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

पश्चिमी गठबंधन में दरार

एक तरफ अमेरिका ईरान से लड़ रहा है, तो दूसरी तरफ उसके ही सहयोगी ब्रिटेन और इज़रायल एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं। ब्रिटेन द्वारा इज़रायली बस्तियों के सामान पर प्रतिबंध लगाने के बाद, इज़रायल ने कड़ा रुख अपनाते हुए ब्रिटिश दूतावास बंद करने और ब्रिटिश नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगाने की धमकी दी है। सहयोगियों के बीच की यह आपसी फूट ईरान के लिए एक कूटनीतिक राहत के रूप में देखी जा रही है।

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