वंदे मातरम विवाद: इंडिया गठबंधन में पड़ी दरार, NC के रुख से कांग्रेस असहज
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जम्मू-कश्मीर में वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को गाने को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब इंडिया (INDIA) गठबंधन के भीतर की वैचारिक खाई को उजागर कर रहा है। सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पूरे वर्जन के गायन पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) आमने-सामने आ गए हैं।

कांग्रेस का एतराज: धर्मनिरपेक्षता बनाम परंपरा कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस विवाद की शुरुआत करते हुए कहा कि वंदे मातरम का पूरा वर्जन स्वतंत्रता सेनानियों की उस मिली-जुली सोच के खिलाफ है, जो उन्होंने देश के लिए देखी थी। उन्होंने तर्क दिया कि गांधी, नेहरू और पटेल जैसे नेताओं की सलाह पर आजादी के समय केवल छोटे हिस्से को चुना गया था ताकि इसे सांप्रदायिक रंग न मिले। वहीं, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख तारिक हमीद कर्रा का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान तभी बढ़ता है जब वे भारत की विविधता को अपनाते हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का पलटवार: जबरदस्ती ठीक नहीं दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने कांग्रेस की चिंता को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता तनवीर सादिक ने दो टूक कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में कानून और नियमों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा, जब अन्य राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं और वहां पूरा वंदे मातरम गाया जाता था, तब यह मुद्दा क्यों नहीं उठा? हमारा रुख स्पष्ट है, जो गाना चाहता है वो गाए, किसी पर जबरदस्ती न हो।

BJP का तंज: कांग्रेस को मिला करारा जवाब इस विवाद में BJP ने मौके का फायदा उठाते हुए NC की तारीफ की है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इसे कांग्रेस के मुंह पर जोरदार तमाचा करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला का शपथ समारोह में पूरा वंदे मातरम बजने तक खड़े रहना, यह संदेश देता है कि जम्मू-कश्मीर में भारत-विरोधी नीतियां नहीं चलने वालीं। भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय संस्थानों के प्रति ऐतिहासिक असहजता का भी आरोप लगाया है।

PDP की संतुलित राय: देशभक्ति का पैमाना क्या? पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने इस पूरे मामले को खतरनाक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता सैयद तजामुल इस्लाम ने कहा, किसी कार्यक्रम में खड़े होने या बैठे रहने से किसी की देशभक्ति तय नहीं होती। संविधान व्यक्तिगत इच्छा और अंतरात्मा की आजादी देता है। देशभक्ति का पैमाना तय करना और उसे जबरदस्ती थोपना गलत है।

बढ़ती दरार का भविष्य शपथ ग्रहण समारोह में फारूक और उमर अब्दुल्ला का राष्ट्रगीत के दौरान सम्मान में खड़े रहना और कांग्रेस की ओर से उस पर आपत्ति जताना, गठबंधन की अंदरूनी कलह को साफ दर्शाता है। यह बहस अब केवल राष्ट्रगीत के छंदों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह इस बात पर केंद्रित हो गई है कि एक विविधतापूर्ण लोकतंत्र में राष्ट्रीय प्रतीकों को देखने का नजरिया क्या होना चाहिए। फिलहाल, इस विवाद ने जम्मू-कश्मीर की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है।

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