नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने देश में रेल नेटवर्क को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 656 किलोमीटर लंबी तीन प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट न केवल पांच राज्यों के औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि बिहार के लिए भी वरदान साबित होगा।
क्या है यह मेगा रेल प्रोजेक्ट? सरकार ने जिन तीन रेल नेटवर्क को मंजूरी दी है, उनमें कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन, खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसे पूरा करना है, जिससे देश के हाई-डेंसिटी वाले रेल कॉरिडोर को फोर-लेन और क्वाड्रपल में बदला जा सके।
बिहार को कैसे होगा फायदा? बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस फैसले को राज्य के लिए ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-गुवाहाटी हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के विकास से बिहार की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। चूंकि बिहार इन प्रमुख रूटों के केंद्र में स्थित है, इसलिए राज्य से गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी और व्यापार में सुगमता आएगी।
रूट्स का जाल और तेजी से बढ़ता दायरा रेलवे की योजना के अनुसार, दिल्ली-गुवाहाटी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के तहत बिहार के कई जिलों में विकास कार्य किए जाएंगे। इसमें नरकटियागंज (पश्चिमी चंपारण), रक्सौल, सीतामढ़ी, दरभंगा, सरायगढ़ (सुपौल) और अररिया जैसे जिलों में रेल लाइनों के दोहरीकरण (Double Tracking) का काम प्रस्तावित है। इससे न केवल यात्रियों को समय पर ट्रेनें मिलेंगी, बल्कि माल ढुलाई की रफ्तार भी बढ़ेगी।
आर्थिक विकास को मिलेगी नई दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से बिहार का लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। बेहतर रेल सुविधा मिलने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि यह क्षेत्रीय व्यापार और औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने में भी मददगार साबित होगा। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में भारतीय रेल अब आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से खुद को ढाल रही है।
*देश की रेल कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 9, 2026
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल का महत्वपूर्ण निर्णय, हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-लेन/क्वाड्रपल करने के साथ-साथ भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए अन्य महत्वपूर्ण कॉरिडोर… pic.twitter.com/ISEIe3CI8t
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