मंच पर अचानक मिला चीन का पर्चा , फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने भरी सभा में सुनाई खरी-खोटी
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दक्षिण कोरिया के सोल में आयोजित सोल डिफेंस डायलॉग 2026 के दौरान एक नाटकीय घटना घटी, जिसने दक्षिण चीन सागर के विवाद को फिर से गरमा दिया है। फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो सी. थियोडोरो जूनियर जब मंच से संबोधित कर रहे थे, तभी उन्हें एक कर्मचारी द्वारा चीन की ओर से भेजा गया एक पर्चा सौंपा गया।

क्या था उस पर्चे में? रक्षा मंत्री गिल्बर्टो ने बिना संकोच किए मंच पर ही वह पर्चा पढ़कर सुनाया। नोट में 2016 के हेग ट्रिब्यूनल के फैसले को अवैध बताते हुए चीन का रुख दोहराया गया था। इसमें लिखा था कि चीन इस मध्यस्थता को न मानता है, न स्वीकार करता है और न ही करेगा।

पर्चे में चीन के दावे को पढ़ते हुए गिल्बर्टो ने बीच में ही टोकते हुए तंज कसा, क्योंकि आप हार गए हैं। यह टिप्पणी 2016 के उस अंतरराष्ट्रीय फैसले की ओर इशारा थी, जिसमें चीन के नाइन-डैश लाइन वाले दावों को अदालत ने अवैध घोषित किया था।

चीन को शिष्टाचार सीखने की जरूरत है इस घटना से नाराज फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने चीन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस हरकत को धौंस जमाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा, यह न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का अनादर है, बल्कि यह उन बुनियादी शिष्टाचार का भी उल्लंघन है जो एक मेजबान देश और वहां मौजूद लोगों के प्रति दिखाए जाने चाहिए।

गिल्बर्टो ने पर्चा लाने वाले व्यक्ति को संबोधित करते हुए कहा, मैं इस कागज़ को इस बात की निशानी के तौर पर रखूंगा कि चीन कितना बेताब है। आपने आज अपने देश की बहुत बड़ी सेवा की है, क्योंकि आपने दुनिया को दिखा दिया कि आप कितने कमजोर हैं।

चीन का क्या है रुख? इस मामले पर जब चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से पूछा गया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब देने के बजाय कहा कि उन्हें घटना की पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने फिलीपींस को दिखावा और गड़बड़ी पैदा करना बंद करने की नसीहत जरूर दी।

क्यों अहम है दक्षिण चीन सागर? दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। चीन इस पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई जैसे देश इसे लेकर अक्सर चीन के साथ टकराव की स्थिति में रहते हैं।

चीन ने इस इलाके में न केवल कृत्रिम द्वीप बनाए हैं, बल्कि वहां सैन्य अड्डे भी स्थापित कर लिए हैं, जिससे इस क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है। अब इस नई घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर चीन की आक्रामक नीतियों को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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