खाने में कीड़े और बदहाल व्यवस्था: रायबरेली में सड़कों पर उतरे छात्र, प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा
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उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय आश्रम पद्धति विद्यालय के छात्रों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। बीती रात अपनी बदहाल शिक्षा व्यवस्था और सुविधाओं के विरोध में छात्रों ने एक लंबा मार्च निकाला। वे स्कूल से करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर शहर की सड़कों पर उतर आए।

3 किलोमीटर का पैदल मार्च और छात्रों का आक्रोश पसीने से लथपथ और भूखे-प्यासे छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर हुए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कूल के भीतर बिजली-पानी का संकट, भोजन की खराब गुणवत्ता और शिक्षकों की कमी से उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है। भारी संख्या में छात्रों को सड़क पर देख प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया।

प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप छात्रों ने स्कूल के प्रिंसिपल अवधेश कुमार यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समस्याओं को लेकर वे कई बार औपचारिक शिकायत दर्ज करा चुके हैं, लेकिन प्रिंसिपल ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया। छात्रों के मुताबिक, उनकी शिकायतों को सुनने के बजाय रद्दी की तरह डस्टबिन में फेंक दिया जाता रहा है।

खाने में कीड़े और संसाधनों का अभाव प्रदर्शनकारी छात्रों की सबसे बड़ी पीड़ा भोजन की गुणवत्ता थी। उनका कहना है कि मेस में मिलने वाले खाने में कीड़े पाए जाना एक आम समस्या बन चुका है। इसके अलावा, स्कूल में न तो पर्याप्त किताबें हैं और न ही छात्रों को पढ़ाने के लिए पूरे शिक्षक। जो छात्र बेहतर शिक्षा की उम्मीद लेकर यहां पहुंचे थे, वे आज बुनियादी संसाधनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

सोलर पैनल के बावजूद अंधेरे में स्कूल बिजली की समस्या ने छात्रों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। स्कूल परिसर में सोलर पैनल तो लगाए गए हैं, लेकिन वे शो-पीस बनकर रह गए हैं। सोलर पैनल खराब होने के कारण छात्रों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

क्या अब जागेगा प्रशासन? सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद छात्रों ने अपनी समस्याओं का पुलिंदा उनके सामने खोल दिया। अधिकारियों ने फिलहाल जांच और सुधार का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अगस्त माह में लखनऊ के सर्वोदय विद्यालय में भी छात्र इन्हीं समस्याओं को लेकर सड़क पर उतर चुके हैं। सवाल यह है कि कब तक प्रदेश के सर्वोदय विद्यालयों में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं हासिल करने के लिए सड़कों का रुख करना पड़ेगा?

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