क्या भारत रत्न CNR राव को मिला था चुनाव आयोग का नोटिस? सच क्या है और कैसे शुरू हुआ विवाद?
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नई दिल्ली: हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 92 वर्षीय भारत रत्न वैज्ञानिक प्रोफेसर सी.एन.आर. राव को मतदाता सूची में नाम की मामूली विसंगति के कारण चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा है। इस खबर ने सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। हालांकि, अब कर्नाटक चुनाव कार्यालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

क्या था पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 2002 की पुरानी मतदाता सूची और मौजूदा रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग (Prof. vs Proff.) में अंतर के कारण वैज्ञानिक को पहचान सत्यापन के लिए पेश होने का नोटिस दिया गया। कयास लगाए जा रहे थे कि अगर एक दिग्गज हस्ती के साथ यह हो सकता है, तो आम नागरिकों के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया कितनी चुनौतीपूर्ण होगी।

चुनाव कार्यालय ने क्या कहा?

बेंगलुरु के अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारी (ADEO) ने स्पष्ट किया कि प्रोफेसर सी.एन.आर. राव या उनके परिवार को कोई नोटिस नहीं भेजा गया। आयोग के अनुसार, अधिकारियों की एक टीम स्वयं मल्लेश्वरम स्थित उनके घर गई थी। वहां उन्होंने एन्यूमरेशन फॉर्म भरवाया और मौके पर ही सत्यापन प्रक्रिया पूरी की।

8 सितंबर को मिली मंजूरी

अधिकारियों ने बताया कि 8 सितंबर 2026 को सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) ने सभी औपचारिकताओं के बाद अंतिम मतदाता सूची में प्रोफेसर राव का नाम शामिल करने की औपचारिक मंजूरी दे दी थी। चुनाव कार्यालय ने इस दावे के समर्थन में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) की वीडियो क्लिप भी जारी की है।

मिसमैच और नोटिस में अंतर

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान डेटा का मिलान किया जाता है। यदि पुराने और नए रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो उसे मिसमैच माना जाता है, न कि सीधे नोटिस । प्रोफेसर राव के मामले में डेटा में जो अंतर दिखा, उसे व्यक्तिगत सुनवाई के बजाय घर जाकर सत्यापित करना उचित समझा गया, ताकि उन्हें कोई असुविधा न हो।

कौन हैं सी.एन.आर. राव?

प्रोफेसर चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक हैं। सॉलिड-स्टेट और मैटेरियल केमिस्ट्री में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था। वे बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं।

SIR प्रक्रिया पर क्यों है बहस?

कर्नाटक में चल रहे SIR अभियान के दौरान राहुल द्रविड़ और प्रकाश राज जैसी हस्तियों के नाम भी चर्चा में आए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन इस दौरान होने वाली प्रशासनिक जटिलताओं का असर मतदाताओं पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रोफेसर राव का मामला यह दर्शाता है कि पारदर्शिता और संवाद के जरिए चुनाव आयोग इन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहा है।

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