ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: दिल्ली में पुतिन और जिनपिंग के लिए अभेद्य किला तैयार, चप्पे-चप्पे पर नजर
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भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली पहुंच रहे हैं। इनकी सुरक्षा के लिए राजधानी में अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है।

आईटीसी मौर्या में रुकेंगे पुतिन, होटल खाली करवाया गया

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली के प्रतिष्ठित आईटीसी मौर्या होटल में ठहरेंगे। यह वही होटल है जहां पिछले साल जी20 सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन रुके थे। सुरक्षा के लिहाज से होटल के ज्यादातर कमरों को खाली करवा लिया गया है और बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

रूस की सीक्रेट सर्विस और NSG का डेरा

पुतिन की सुरक्षा की बागडोर रूस की अपनी सीक्रेट सर्विस और भारतीय एजेंसियों ने मिलकर संभाली है। होटल के आसपास पैरा मिलिट्री फोर्स और दिल्ली पुलिस का कड़ा पहरा है। इसके साथ ही एनएसजी (NSG) कमांडो और रॉ (RAW) के अधिकारी सुरक्षा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सरदार पटेल मार्ग पर सुरक्षा के लिए 5000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

ताज होटल में ठहरेंगे शी जिनपिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए ताज होटल को सुरक्षित किया गया है। उनके आगमन को देखते हुए होटल को अभी से सील कर दिया गया है। जिनपिंग की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। सात साल बाद दिल्ली आ रहे जिनपिंग का स्वागत और सुरक्षा भारत के लिए विशेष प्राथमिकता है।

ड्रोन से निगरानी और अभेद्य घेराबंदी

हवाई और जमीनी दोनों स्तरों पर सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। खुफिया इनपुट के आधार पर पूरे इलाके में ड्रोन से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली के प्रमुख फाइव स्टार होटलों में सुरक्षा के चलते कमरों की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जहां एक कमरे का किराया ढाई लाख रुपये तक पहुंच गया है।

भारत के लिए ब्रिक्स का महत्व

पिछले साल जी20 में शामिल न होने वाले रूसी राष्ट्रपति पुतिन का इस बार भारत आना कूटनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन के मंच पर पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। यह सम्मेलन न केवल क्षेत्रीय सहयोग के लिए, बल्कि भारत के ग्लोबल स्टैचर को साबित करने का भी बड़ा मंच है।

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