8 सितंबर 2026 की तारीख कूटनीतिक इतिहास में एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गई है। ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने संसद में घोषणा की कि ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से होने वाले आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएंगे। इस फैसले के महज दो घंटे बाद इजरायल ने तीखा पलटवार करते हुए पूर्वी यरुशलेम में ब्रिटिश दूतावास को बंद करने और ब्रिटिश सांसदों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया।
यह घटनाक्रम महज एक राजनयिक झड़प नहीं, बल्कि उस बढ़ते वैश्विक दबाव का सबूत है जो इजरायल को धीरे-धीरे अलग-थलग कर रहा है।
इस विवाद की जड़ वेस्ट बैंक में बस्तियों का तेजी से फैलाव है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार अवैध मानी जाने वाली इन बस्तियों में इजरायल द्वारा 1,200 नए घरों के टेंडर जारी करना ब्रिटेन और अन्य देशों के लिए अंतिम सीमा साबित हुआ। E1 इलाके में यह निर्माण कार्य फिलिस्तीनी राज्य के अस्तित्व को ही समाप्त करने जैसा है, जिसे पश्चिमी देशों ने एक लाल रेखा माना है।
ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने संसद में जातीय सफाई (ethnic cleansing) जैसा कड़ा शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वेस्ट बैंक में चरमपंथी बसने वालों द्वारा फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा हो रही है, जिसे नेतन्याहू सरकार का मौन समर्थन प्राप्त है। इजरायल ने इसे अपमानजनक झूठ बताया, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि यूरोपीय देश अब महज चिंता जताने के बजाय सीधे कार्रवाई की भाषा बोल रहे हैं।
अब यह विरोध केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। फ्रांस, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन सहित 12 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर दो-राज्य समाधान की सुरक्षा पर जोर दिया है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने खुले तौर पर कहा कि वेस्ट बैंक विस्फोट की कगार पर है, जिसके लिए बस्तियों का पागलपन भरा विस्तार जिम्मेदार है।
इजरायल ने भी कड़े रुख अपनाए हैं। उन्होंने न केवल गाजा समन्वय मिशन से ब्रिटेन को बाहर किया, बल्कि जेरेमी कॉर्बिन और डायने एबॉट जैसे प्रमुख ब्रिटिश सांसदों की इजरायल यात्रा पर भी रोक लगा दी है। अपने सबसे पुराने और करीबी सहयोगियों के साथ इस तरह का व्यवहार इजरायल को वैश्विक मंच पर और अधिक अकेला कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए नरसंहार (होलोकॉस्ट) के कारण यूरोप का जो अपराधबोध इजरायल के लिए सुरक्षा कवच का काम करता था, वह अब खत्म हो रहा है। यूरोपीय नागरिकों के बदलते रुख और जन-दबाव के कारण अब सरकारें ऐतिहासिक संवेदनाओं से ऊपर उठकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर सवाल उठा रही हैं।
JNU के प्रोफेसर डॉ. राजन कुमार के अनुसार, इजरायल के भविष्य के लिए तीन परिदृश्य हो सकते हैं:
फिलहाल, इजरायल का यह बर्ताव उसे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में एक पैरिया स्टेट (अछूत देश) की ओर धकेल रहा है। बस्तियों का मुद्दा अब केवल फिलिस्तीन का विषय नहीं रह गया है, यह इजरायल के अपने अस्तित्व की कूटनीतिक परीक्षा बन चुका है।
La France va mettre fin au commerce avec les colonies israéliennes situées dans les Territoires palestiniens occupés, avec onze autres pays qui ont pris des engagements du même ordre.
— Jean-Noël Barrot (@jnbarrot) September 8, 2026
Pourquoi ?
Parce que la Cisjordanie est au bord de l explosion : expansion effrénée de la… pic.twitter.com/mJStC3HgOk
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