उज्जैन में अंगद का पैर बने बजरंगबली: 8 फीट की प्रतिमा हिलाने में पसीने-पसीने हुआ प्रशासन
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उज्जैन: महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों एक अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। सती गेट के समीप स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर की 8 फीट ऊंची प्रतिमा प्रशासन के लिए रहस्य और चुनौती का विषय बन गई है। पिछले एक हफ्ते से इसे हटाने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं। आलम यह है कि बड़ी-बड़ी मशीनें भी इस प्रतिमा को टस से मस नहीं कर पा रही हैं।

बुलडोजर चला, पर विग्रह नहीं हिला प्रशासन ने सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए इस मंदिर को हटाने का निर्णय लिया था। 4 सितंबर को भारी पुलिस बल और पोकलेन मशीनों की मदद से मंदिर का ढांचा, गुंबद और गर्भगृह की दीवारें तो ढहा दी गईं, लेकिन जब बारी 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को हटाने की आई, तो चमत्कार जैसी स्थिति पैदा हो गई। मजदूर और मशीनें हार मान गईं।

विज्ञान बनाम आस्था का द्वंद्व प्रतिमा को हिलाने के लिए जब जमीन के नीचे खुदाई की गई, तो उसमें दरारें आने लगीं। भक्तों ने चेतावनी दी कि विग्रह खंडित नहीं होना चाहिए, जिसके चलते काम रोकना पड़ा। अब इस रहस्य को सुलझाने के लिए IIT इंदौर की टीम को बुलाया गया है। वैज्ञानिक ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार और 3D लेजर स्कैनिंग के जरिए यह पता लगा रहे हैं कि प्रतिमा का आधार कितना गहरा है।

इंजीनियरिंग का पेच या चमत्कार? विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रतिमा का वजन और इसका बेस काफी जटिल हो सकता है। यह प्रतिमा संभवतः बेसाल्ट पत्थर से बनी है, जिसका घनत्व अत्यधिक होता है। हो सकता है कि प्रतिमा का निचला हिस्सा जमीन के भीतर किसी विशाल आधारशिला के साथ मजबूती से जुड़ा हो। हालांकि, स्थानीय श्रद्धालु इसे रामचरितमानस में वर्णित अंगद के पैर की घटना से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि यह बजरंगबली का अचल रूप है, जो मंदिर तोड़ने की प्रशासन की मनमानी के खिलाफ अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।

अब आगे क्या? फिलहाल प्रतिमा उसी स्थान पर खुले में एक टेंट के नीचे विराजमान है और भक्त दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। प्रशासन अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। जहां एक ओर सरकारी अमले की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। हनुमान भक्त इसे अपनी आस्था की विजय मान रहे हैं, वहीं विज्ञान अभी भी इस प्राचीन निर्माण की जड़ें खोजने में लगा है।

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