भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक बार फिर कानूनी घेरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से एक सीधा और तीखा सवाल करते हुए पूछा है कि आखिर क्यों BCCI और उसके राज्य क्रिकेट संघों को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के दायरे से बाहर रखा जाए?
क्या बदलेगा कानून के दायरे में आने से? चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने बोर्ड के वकीलों को इस पर स्पष्ट रुख अपनाने के निर्देश दिए हैं। यदि BCCI इस कानून के अंतर्गत आता है, तो बोर्ड सीधे सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे में आ जाएगा। इससे खेल प्रशासन में सरकारी निगरानी बढ़ेगी और बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगेगी। कोर्ट का उद्देश्य खेल संस्थाओं में पारदर्शिता लाना और वित्तीय धांधलियों को रोकना है।
दो राज्य संघ AGM से बाहर BCCI की आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) से पहले दो राज्य क्रिकेट संघों के लिए बुरी खबर है। बड़ौदा और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट बोर्ड को इस बैठक से बाहर कर दिया गया है।
चुनाव अधिकारी एके जोटी ने कागजी कमियों और नियमों के उल्लंघन के चलते यह सख्त फैसला लिया है। बड़ौदा के प्रणव अमीन और जम्मू-कश्मीर के देश रतन दुबे का नामांकन खारिज होने के कारण, अब इन दोनों राज्यों के प्रतिनिधि न तो बैठक में चर्चा कर सकेंगे और न ही वोट डाल पाएंगे।
IPL गवर्निंग काउंसिल: धूमल और मजूमदार की राह साफ भले ही प्रशासनिक हलचल तेज हो, लेकिन IPL गवर्निंग काउंसिल में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश के अरुण सिंह धूमल और मिजोरम के खैरुल जमाल मजूमदार ने काउंसिल के पदों के लिए नामांकन भरा है।
उनके खिलाफ कोई अन्य उम्मीदवार न होने के कारण, उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। अरुण सिंह धूमल का बने रहना आगामी IPL सीजन की तैयारियों और आयोजनों को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भारतीय क्रिकेट के ढांचे में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि BCCI कोर्ट में क्या जवाब पेश करता है। यदि अदालत का रुख नरम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बीसीसीआई के काम करने के तरीके में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
*BCCI updates for the day:
— Cricbuzz (@cricbuzz) September 9, 2026
🚨 The Supreme Court has asked the BCCI to explain why it and the state associations should not come under the National Sports Governance Act, 2025.
🚨 Arun Singh Dhumal of Himachal Pradesh and Mizoram’s Khairul Jamal Majumdar have filed their… pic.twitter.com/4SQR2mBa0i
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