उज्जैन के अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सड़क चौड़ीकरण के काम के चलते प्रशासन करीब 40 घंटों से प्रतिमा को विस्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तमाम आधुनिक मशीनों और JCB के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई है।
आस्था या प्राचीन इंजीनियरिंग? स्थानीय श्रद्धालु इसे हनुमान जी का चमत्कार मान रहे हैं। मंदिर के पुजारी महेश पंडित का कहना है कि यह बाबा का संकेत है कि वे इस स्थान को नहीं छोड़ना चाहते। वहीं, विशेषज्ञों की राय अलग है। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र के बेसाल्ट पत्थर से बनी है और इसमें परमार काल की प्राचीन तकनीक का उपयोग हुआ है। संभव है कि प्राचीन काल में इसे लॉकिंग सिस्टम या विशेष आधार तकनीक के जरिए जमीन में मजबूती से जड़ा गया हो, जिसे आधुनिक मशीनें आसानी से नहीं समझ पा रही हैं।
प्रशासन ने बदली रणनीति लगातार विरोध और सफलता न मिलने के बाद प्रशासन ने अब आक्रामक रवैया छोड़ दिया है। प्रतिमा को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाने के लिए खुदाई रोक दी गई है और अब विशेषज्ञों की मदद लेने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने प्रतिमा के आधार और उसकी अंदरूनी संरचना को समझने के लिए अत्याधुनिक मशीनों से स्कैनिंग कराने का फैसला किया है।
क्या कहता है पुरातत्व विभाग? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी प्राचीन धरोहरों को हटाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग की तकनीकी सलाह जरूरी है। स्कैनिंग रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए कैसे विस्थापित किया जा सकता है। वर्तमान में प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित कर दिया गया है, और वहां श्रद्धालुओं का कड़ा पहरा है।
विकास और आस्था का टकराव उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है। प्रशासन का लक्ष्य प्रतिमा को सुरक्षित रूप से टंकी चौक पर पुनर्स्थापित करना है, लेकिन धार्मिक भावनाएं और प्रतिमा की मजबूत संरचना इस राह में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। फिलहाल, पूरा शहर अब उस स्कैनिंग रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जो तय करेगी कि क्या बाबा अपनी जगह से हटेंगे या प्रशासन को सड़क का नक्शा बदलना पड़ेगा।
*Ujjain’s 170-year-old Khade Hanuman Temple has become a powerful moment of faith. Despite three days of efforts during the shifting process for road widening, the idol at Sati Gate reportedly did not move.
— अथर्व (@Talwar_1009) September 7, 2026
Devotees see this as Hanuman Ji’s divine will. Further decisions will… pic.twitter.com/njyiANJA7c
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