बंगाल की थाली पर पाखंडी वाले बयान से उबाल, BJP ने धीरेंद्र शास्त्री को दिया करारा जवाब
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में खान-पान और संस्कृति का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा बंगालियों के मांसाहार पर की गई टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया है। इसे लेकर अब भारतीय जनता पार्टी भी बचाव की मुद्रा में नहीं, बल्कि अपने स्टैंड पर कायम दिख रही है।

क्या कहा था धीरेंद्र शास्त्री ने? विवाद की शुरुआत 6 सितंबर को हावड़ा के लिलुआ में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान हुई। अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि बंगालियों को दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने आगे यह भी जोड़ दिया कि जो लोग मांसाहार करते हैं, वे पाखंडी होते हैं। इस बयान ने राज्य में भारी आक्रोश पैदा कर दिया।

समिक भट्टाचार्य का तीखा पलटवार पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी साधु या राजनीतिक दल को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि बंगाल की जनता क्या खाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाली वही खाएंगे जो उनका मन करेगा और जो उनकी संस्कृति का हिस्सा है।

स्वामी विवेकानंद का दिया उदाहरण भट्टाचार्य ने तर्क देते हुए कहा, जब स्वामी विवेकानंद ने बंगाल की खान-पान परंपरा पर कोई आपत्ति नहीं जताई, तो हम दूसरों की बात क्यों मानें? मां काली को यहां मटन का भोग चढ़ाया जाता है। अष्टमी को लुची और नवमी को मटन खाना बंगाल की संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी केवल स्वामी विवेकानंद के विचारों को सर्वोपरि मानती है।

TMC और कांग्रेस ने घेरा बागेश्वर बाबा के इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भाजपा को निशाने पर ले लिया है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि बाबा का ग्रैंड वेलकम करके भाजपा बंगालियों की थाली से उनका खाना छीनना चाहती है। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने भी तीखा हमला करते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को राज्य में इतनी अहमियत देकर भाजपा अपनी कमजोर स्थिति का प्रदर्शन कर रही है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल हालांकि समिक भट्टाचार्य ने स्वीकार किया कि धीरेंद्र शास्त्री एक सम्मानित कथावाचक हैं और उनकी लोकप्रियता व्यापक है, लेकिन बंगाल की सांस्कृतिक अस्मिता से समझौता करने के मूड में भाजपा नहीं है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर लगातार भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है, जिसे दुर्गा पूजा से ठीक पहले सांस्कृतिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

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