प्रेशर में निकलता है मेरा बेस्ट गेम : 270 रन ठोककर ईशान किशन ने खोला अपनी बल्लेबाजी का राज
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दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईशान किशन का नाम हर तरफ गूंज रहा है। एमए चिदंबरम स्टेडियम में साउथ जोन के खिलाफ ईस्ट जोन की कप्तानी संभालते हुए ईशान ने 270 रनों की मैराथन पारी खेली। उनकी इस यादगार पारी ने न केवल टीम को 708 रनों के विशाल स्कोर तक पहुंचाया, बल्कि अपनी बल्लेबाजी की परिपक्वता से सबको हैरान भी कर दिया।

522 मिनट तक पिच पर डटे रहे ईशान

ईशान किशन ने इस हाईवोल्टेज मुकाबले में धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल दिखाया। उन्होंने कुल 522 मिनट तक बल्लेबाजी की और 334 गेंदों का सामना करते हुए 270 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 30 चौके और 7 छक्के जड़े। 250 रन के स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट होकर बाहर जाने के बावजूद, उन्होंने अपनी टीम के लिए दोबारा पिच पर उतरकर 20 और रन जोड़े, जो उनके टीम-फर्स्ट अप्रोच को दर्शाता है।

गैप में खेलने पर था ध्यान

अपनी पारी पर बात करते हुए ईशान ने कहा कि उन्होंने जोखिम लेने के बजाय गेंद को मेरिट के आधार पर खेलना बेहतर समझा। उन्होंने बताया, मुझे लगता है कि दबाव में ही मेरा सर्वश्रेष्ठ खेल बाहर आता है। मैंने शॉट्स खेलते समय जोखिम नहीं लिया, बल्कि गेंद को गैप में मारने और उसे बेहतर तरीके से जज करने पर ध्यान केंद्रित किया। जब आप टीम के स्कोर को ध्यान में रखकर खेलते हैं, तो आपकी बल्लेबाजी अपने आप बेहतर हो जाती है।

मोहम्मद सिराज के खिलाफ थी खास रणनीति

भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज का सामना करना किसी भी बल्लेबाज के लिए चुनौती होती है, लेकिन ईशान ने इसके लिए एक खास प्लान तैयार किया था। उन्होंने खुलासा किया कि सिराज के खिलाफ वह थोड़ा झुककर बल्लेबाजी कर रहे थे ताकि बाउंसर का सामना आसानी से किया जा सके।

ईशान ने कहा, सिराज के सामने मेरी कोशिश विकेट बचाने की थी। मैं थोड़ा झुककर बैटिंग कर रहा था ताकि अगर वह गेंद को पटकते हैं, तो वह मेरे लिए खतरनाक न हो। यह ट्रिक बाउंसर के लिए नहीं थी, बल्कि अपने विकेट को सुरक्षित रखने के लिए थी ताकि मैं टीम के लिए लंबे समय तक क्रीज पर टिका रह सकूं।

बड़े मैचों के खिलाड़ी ईशान

ईशान किशन का यह प्रदर्शन साबित करता है कि वह बड़े मंच के खिलाड़ी हैं। नर्वसनेस के बावजूद आक्रामक रुख अपनाना और टीम की जरूरत के हिसाब से ढलना उनकी इस पारी की सबसे बड़ी खूबी रही। जिस तरह से उन्होंने चेपॉक की कठिन परिस्थितियों में खुद को ढाला, उसने आने वाले समय के लिए एक बड़ा संदेश दिया है।

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