12 और 13 सितंबर को दिल्ली का भारत मंडपम एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने जा रहा है। भारत 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। 20 साल पूरे कर चुका यह समूह अब 5 से बढ़कर 11 देशों का परिवार बन गया है। इस बार भारत ने ह्यूमैनिटी फर्स्ट (मानवता सबसे पहले) के मूल मंत्र के साथ एक व्यावहारिक एजेंडा तैयार किया है।
नई दिल्ली की कोशिश ब्रिक्स को किसी देश के खिलाफ खड़ा करने की नहीं, बल्कि इसे विकास, व्यापार और तकनीक का एक प्रभावी मंच बनाने की है। आइए जानते हैं वे 7 बड़े मुद्दे जिन पर भारत दुनिया का ध्यान खींचेगा:
भारत ब्रिक्स को उन विकासशील देशों की आवाज बनाना चाहता है, जिनकी अनदेखी अक्सर यूएन (UN) और आईएमएफ जैसे वैश्विक संस्थानों में की जाती है। भारत का लक्ष्य इन संस्थानों में सुधार लाकर विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाना है।
युद्धों और अस्थिर व्यापारिक परिस्थितियों के बीच, भारत एक ऐसे व्यापारिक ढांचे पर जोर दे रहा है जहां किसी एक देश पर निर्भरता कम हो। जयपुर में बनी ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030 के जरिए भारत कच्चे माल और तकनीक के सुरक्षित विकल्प तैयार करने पर काम कर रहा है।
भारत डॉलर को खत्म करने के बजाय अपनी फिनटेक ताकत पर दांव लगा रहा है। भारत का सुझाव है कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार हो और यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ा जाए, ताकि क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन सस्ता और पारदर्शी बन सके।
भारत चाहता है कि ब्रिक्स देश केवल तकनीक के उपभोक्ता न रहें, बल्कि खुद इसके निर्माता बनें। इसमें ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड , एआई (AI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इसका लाभ ग्लोबल साउथ के युवाओं तक पहुंचे।
ब्रिक्स में दुनिया के सबसे बड़े तेल-गैस उत्पादक और उपभोक्ता दोनों शामिल हैं। भारत का लक्ष्य किफायती ऊर्जा के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) की ओर बढ़ने के लिए टिकाऊ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाना है ताकि विकास की गति न रुके।
भारत का एक अहम प्रस्ताव आर्थिक भगोड़ों को लेकर है। भारत चाहता है कि ब्रिक्स सदस्य देश जांच एजेंसियों के बीच सीधी जानकारी साझा करें ताकि वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों का प्रत्यर्पण और उनकी संपत्ति की जब्ती की प्रक्रिया तेज हो सके।
11 देशों के इस समूह में विचारों और हितों का अंतर होना स्वाभाविक है। भारत की असली चुनौती इन देशों को एक साथ लाकर सामूहिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने की है। भारत इसे अमेरिका या G7 के विरोधी गुट के बजाय, अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखते हुए एक उपयोगी मंच बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
निष्कर्ष: क्या भारत इस सम्मेलन में अपने कूटनीतिक संतुलन को साध पाएगा? यह शिखर सम्मेलन केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तय करेगा कि ब्रिक्स आने वाले समय में विश्व व्यवस्था में कितनी व्यावहारिक भूमिका निभाता है।
*Different strengths. One shared purpose.
— Indian Diplomacy (@IndianDiplomacy) September 8, 2026
India’s BRICS Chairship 2026 is deepening partnerships across diverse areas, including customs and standards, energy, agriculture and seeds, asset recovery, digital capacity building, science, traditional medicine and mental wellness,… pic.twitter.com/wNeUADhvvg
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