बंगाली वही खाएंगे जो हमेशा खाते आए हैं , बागेश्वर बाबा के बयान पर डैमेज कंट्रोल में जुटी BJP
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पश्चिम बंगाल में इन दिनों धार्मिक परंपराओं और खान-पान को लेकर छिड़े विवादों ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले 24 घंटों में दो बड़े घटनाक्रमों ने पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया है, जिससे निपटने के लिए अब प्रदेश नेतृत्व को डैमेज कंट्रोल मोड में आना पड़ा है।

बागेश्वर बाबा का बयान और बढ़ा विवाद

हनुमान कथा के लिए बंगाल पहुंचे बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर दी। उन्होंने मांस खाने वालों को पाखंडी और विधर्मी तक करार दे दिया। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में आग में घी डालने का काम किया है।

कांग्रेस का कड़ा रुख

बाबा के इस बयान के बाद राज्य में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे बंगाली समाज का अपमान बताते हुए विरोध का बिगुल फूंक दिया है। पार्टी आज दक्षिण कोलकाता में बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने जा रही है। कार्यकर्ताओं को थाने के बाहर जुटने के निर्देश दिए गए हैं।

BJP का डैमेज कंट्रोल

चुनावों के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया था कि बीजेपी आई तो बंगालियों की मछली छीन लेगी। अब बाबा के बयान ने उस डर को फिर से हवा दे दी है। इसे भांपते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि, बंगाली वही खाएंगे जो वे हमेशा से खाते आए हैं। खान-पान निजी पसंद है और बंगाल का कल्चर बहुत विविधतापूर्ण है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी को यह तय करने का हक नहीं है कि कोई क्या खाए।

दिलीप घोष ने भी दी सफाई

बीजेपी नेता दिलीप घोष ने भी स्थिति को संभालते हुए कहा कि बंगाल में मां काली और दुर्गा को बलि चढ़ाने की और उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की सदियों पुरानी परंपरा है। उन्होंने स्वीकार किया कि यहां भगवान को मछली का भोग भी लगाया जाता है। हालांकि, उन्होंने संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि पूजा के दौरान सात्विक वातावरण बनाए रखने के लिए मांस की दुकानें पूजा पंडालों से दूर होनी चाहिए।

सरकारी विज्ञापन पर भी फजीहत

विवादों के बीच, प्रदेश सरकार का एक विज्ञापन भी बड़ी मुसीबत बन गया है। दुर्गा पूजा के सरकारी विज्ञापन में मां दुर्गा की 10 भुजाओं के बजाय 11 भुजाएं दिखाई गई हैं। इस तकनीकी और धार्मिक त्रुटि पर भी जमकर बवाल हो रहा है, जिस पर बीजेपी नेताओं ने माफी मांगी है।

कुल मिलाकर, एक तरफ खान-पान पर बाबा का बयान और दूसरी तरफ सरकारी विज्ञापनों में मां दुर्गा का गलत चित्रण, इन दोनों मुद्दों ने बंगाल में बीजेपी के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।

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