सोच वैश्विक, काम स्थानीय : लंदन में मोहन भागवत का मंत्र, कर्मभूमि और जन्मभूमि पर दिया बड़ा बयान
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यूके की राजधानी लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय मूल के लोगों को ग्लोबली सोचें, लोकली काम करें का मूलमंत्र दिया। इस दौरान उन्होंने सेवा के महत्व और कर्मभूमि के प्रति निष्ठा पर विस्तार से बात की।

कर्मभूमि और निष्ठा का सिद्धांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं की निष्ठा अपनी कर्मभूमि के प्रति होनी चाहिए। उन्होंने कहा, आप अपनी कर्मभूमि के साथ विश्वासघात नहीं कर सकते। यदि आप ब्रिटेन के प्रति वफादार रहते हुए मानवता के लिए खुद को मजबूत बनाते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि किसी के पास अतिरिक्त समय और संसाधन हैं, तो वे अपनी जन्मभूमि यानी भारत की भी सेवा कर सकते हैं। उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता। भागवत के अनुसार, जन्मभूमि संस्कार देती है, जबकि कर्मभूमि वह स्थान है जिसके प्रति व्यक्ति को ईमानदार रहना चाहिए।

सेवा: ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग मोहन भागवत ने सेवा को केवल एक उपकार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, सेवा निस्वार्थ भाव से की जानी चाहिए। यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आपको महान बनाती है या यह कोई दया का काम नहीं है। हम मानते हैं कि सेवा वास्तव में ईश्वर के करीब जाने का एक अवसर है।

उनके अनुसार, सेवा करने के लिए केवल इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। उन्होंने स्वयंसेवकों द्वारा चलाए जा रहे एक हॉस्टल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक अनपढ़ किशोर लड़के ने खुद आगे बढ़कर निस्वार्थ सेवा का जज्बा दिखाया था।

विरोध और सुरक्षा के घेरे में कार्यक्रम गौरतलब है कि इस कार्यक्रम को लेकर लंदन में काफी गहमागहमी थी। मोहन भागवत के दौरे के खिलाफ वहां लगभग 20 संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था और लंदन के मेयर को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी।

पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हालांकि, विरोध के बावजूद संघ ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में लोगों को अपने विचार रखने की पूरी आजादी होनी चाहिए।

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