फ्रूट फ्लाई के दिमाग का ब्लूप्रिंट तैयार: 1.6 लाख न्यूरॉन्स से खुलेगा अल्जाइमर और डिप्रेशन के इलाज का रास्ता
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वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए नर फ्रूट फ्लाई (फल मक्खी) के दिमाग का पहला पूर्ण वायरिंग डायग्राम तैयार कर लिया है। 20 साल की कड़ी मेहनत के बाद तैयार हुए इस मैप में मक्खी के 1,66,000 न्यूरॉन्स और उन्हें जोड़ने वाले लाखों नर्वस कनेक्शन को शामिल किया गया है।

इंसानी जटिलताओं को समझने की पहली सीढ़ी इंसानी दिमाग में करीब 86 अरब न्यूरॉन्स होते हैं, जिन्हें समझना अभी एक बड़ी चुनौती है। फ्रूट फ्लाई लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक आदर्श मॉडल रही है, क्योंकि इनमें सीखने, याद रखने और सामाजिक संपर्क जैसे व्यवहार इंसानी मस्तिष्क से मिलते-जुलते हैं। इस रिसर्च से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि दिमाग के बटन कैसे काम करते हैं—यानी कौन सा न्यूरॉन मक्खी को चलने, फुदकने या सुलाने के निर्देश देता है।

कैसे तैयार हुआ यह महा-नक्शा? इतने सूक्ष्म न्यूरॉन्स की मैपिंग करना बेहद कठिन था। इसके लिए कनेक्टोमिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के जरिए नैनोमीटर पैमाने पर तस्वीरें ली गईं। लाखों रॉ इमेज को प्रोसेस करने के लिए गूगल की कनेक्टोमिक्स टीम ने PATHFINDER नामक एक खास AI सिस्टम बनाया। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यदि यह काम मैनुअली (हाथ से) किया जाता, तो इसे पूरा करने में 50,000 साल लग जाते।

बड़ा डेटा, बड़ी सफलता यह मैप 166,000 न्यूरॉन्स और 12.5 करोड़ सिनेप्टिक कनेक्शन के साथ अब तक का सबसे बड़ा सेलुलर ब्रेन मैप है। इसे बनाने में पूरी दुनिया के वॉलंटियर्स का भी सहयोग लिया गया, जिन्होंने न्यूरॉन्स को वेरिफाई और लेबल करने में मदद की। यह सफलता 2024 में मादा फ्रूट फ्लाई पर हुई रिसर्च का विस्तार है।

मानसिक बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव वैज्ञानिकों का मानना है कि नर फ्रूट फ्लाई का यह पूरा सेंट्रल नर्वस सिस्टम मॉडल चूहों और ज़ेब्राफिश जैसे बड़े जीवों के दिमाग को समझने में मददगार साबित होगा। दीर्घकालिक लक्ष्य स्पष्ट है—दिमाग की कार्यप्रणाली को गहराई से समझना।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह शोध अल्जाइमर, डिप्रेशन और स्किज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों के पीछे छिपे शारीरिक कारणों का पता लगाने में एक मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य में, यह जानकारी दिमागी विकारों से निपटने के लिए नई दवाओं और चिकित्सा पद्धतियों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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