भारी फीस से लेकर EVM की निष्पक्षता तक: अभिषेक मनु सिंघवी ने बेबाकी से दिए हर सवाल के जवाब
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने एक हालिया साक्षात्कार में देश के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात रखी। वकीलों की फीस से लेकर चुनाव आयोग की भूमिका तक, उन्होंने हर विषय पर अपनी राय स्पष्ट की।

क्या अपनी फीस को लेकर बोले सिंघवी? अक्सर चर्चा का विषय रहने वाली वकीलों की भारी फीस पर सिंघवी ने कहा कि फीस का संबंध अनुभव और कार्यक्षमता से होता है। उन्होंने दावा किया कि उनके कुल काम का लगभग 25 से 33 फीसदी हिस्सा प्रो-बोनो (नि:शुल्क) होता है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में या तो अवसर नहीं होता या वे खुद फीस लेने के इच्छुक नहीं होते। साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे पिछले 10 वर्षों में देश के सबसे बड़े टैक्सपेयर्स में शामिल रहे हैं।

EVM और चुनाव प्रक्रिया पर गहरा संदेह चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता पर चिंता जताते हुए सिंघवी ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में संस्थानों की साख में जितनी गिरावट आई है, वह चिंताजनक है। उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र के उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव में केवल जीत ही निष्पक्षता का पैमाना नहीं हो सकती। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड (समान अवसर) का होना अनिवार्य है, जिसे वर्तमान में खतरे में देखा जा रहा है।

वोटर लिस्ट में हेरफेर की आशंका मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने के दावों पर सिंघवी ने गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया संदेह पैदा करती है। उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया पर नागरिकों का भरोसा बनाए रखने के लिए इन अनियमितताओं की गहन जांच जरूरी है।

साम, दाम, दंड, भेद का आरोप सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने के लिए साम, दाम, दंड, भेद का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई चुनाव परिणामों को लेकर विपक्ष के पास अब भी ऐसे सवाल हैं, जिनका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। सिंघवी ने यह भी कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को अपनी बात रखने या सबूत जुटाने का उचित मौका नहीं दिया जा रहा है।

यह साक्षात्कार राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस का कारण बन गया है, जहाँ एक वरिष्ठ वकील और राजनेता ने सीधे तौर पर संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

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