नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने तबाही की ऐसी इबारत लिखी है जिसने हजारों परिवारों को उजाड़ दिया। 1200 से अधिक मौतों और तीन हजार लोगों के लापता होने के बीच, नुवाकोट जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसे विज्ञान भी चमत्कार मान रहा है। 64 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठा 11 दिनों तक मलबे में दबी रहीं और मौत को मात देकर सकुशल बाहर आ गईं।
परिवार ने कर दिया था अंतिम संस्कार चंडिका श्रेष्ठा 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद से लापता थीं। जब कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया। गम और हताशा में डूबे परिवार ने आठवें दिन ही चंडिका की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक रस्में शुरू कर दी थीं। कुश घास से उनका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई थीं।
कैसे बची जान? मलबे से आई रोने की आवाज बचाव कार्य के 11वें दिन नेपाल पुलिस की एक टीम नुवाकोट के बेत्रावती इलाके में सड़क बहाली का कार्य कर रही थी। तभी जवानों को मलबे के ढेर से किसी के कराहने और रोने की धीमी आवाज सुनाई दी। जवानों ने बिना देरी किए कीचड़ हटाना शुरू किया और एक क्षतिग्रस्त घर की खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया। वहां चंडिका जिंदा मिलीं।
100 मीटर खिसक गया था घर रेस्क्यू टीम के अनुसार, बाढ़ का वेग इतना प्रचंड था कि चंडिका का चार मंजिला घर अपनी नींव से करीब 100 मीटर दूर जाकर गिरा था। घर की साढ़े तीन मंजिलें पूरी तरह मलबे में समा गई थीं, जिससे चंडिका सबसे ऊपरी हिस्से के एक छोटे से कोने में फंसी रह गईं। यही वह स्थान था जहाँ उन्हें जीवित रहने के लिए पर्याप्त जगह और हवा मिल सकी।
अभी भी बची है उम्मीद की किरण चंडिका के जीवित मिलने ने इस पूरी आपदा में नई उम्मीद जगा दी है। उनसे एक दिन पहले ही, अपर त्रिशूली 3ए परियोजना की सुरंग से दो मजदूर (संजय शाह और कबीर महारजन) भी सुरक्षित निकाले गए थे। इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि मलबे के ढेर में अभी भी कुछ लोग सांसें ले रहे हो सकते हैं।
परिवार का दर्द अभी भी बाकी चंडिका को सुरक्षित निकालकर काठमांडू के बीरेंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, उनके परिवार के लिए खुशी पूरी नहीं है। चंडिका की बहन, उनकी चाची और एक अन्य परिजन अभी भी मलबे में कहीं लापता हैं। चंडिका के जीजा ईश्वरी लाल ने बताया कि जिस वक्त बाढ़ आई, वे अपनी दुकान पर थे और अपनी आंखों के सामने घर को पानी में बहते देख वे बेसुध होकर गिर पड़े थे। फिलहाल, पूरा इलाका इस चमत्कारिक बचाव की चर्चा कर रहा है।
मिति २०८३ भदौ २० गते नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी बल, नेपाल र नेपाली सेनाको संयुक्त टोलीले जिल्ला नुवाकोट विदुर १० वेत्रावतीबाट १ जना महिलालाई सकुशल उद्धार गरेको छ । pic.twitter.com/Zcuj4bVXOJ
— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) September 5, 2026
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