सत्य निकेतन हादसा: मलबों में जिंदगी, 10.30 घंटों से दिल्ली की सांसें थमी, हर हाथ प्रार्थना को उठे
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुआ दर्दनाक इमारत हादसा पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख गया है। दोपहर करीब 1 बजे पांच मंजिला इमारत के भरभराकर गिरने के बाद से रेस्क्यू ऑपरेशन का काम युद्ध स्तर पर जारी है। बीते 10.30 घंटों से मलबे के नीचे दबी जिंदगियों को बचाने की जंग लड़ी जा रही है।

क्या हुआ था उस वक्त? स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और पीजी (पेइंग गेस्ट) के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के वक्त मलबे में 30 से 50 छात्रों के दबे होने की आशंका जताई गई थी। अब तक 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। दुखद है कि इस हादसे में अब तक 5 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक छात्र युवराज और एक मजदूर शामिल हैं।

जिम्मेदारी पर सियासत और विरोध इस घटना ने दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एबीवीपी ने सिविक सेंटर स्थित एमसीडी ऑफिस में तोड़फोड़ कर कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की है, वहीं एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य में मदद की। उन्होंने जर्जर पड़ोस की एक अन्य इमारत को तुरंत खाली करवाने की अपील भी की, जिसे प्रशासन ने सील कर दिया है।

जांच के आदेश और नेताओं की संवेदनाएं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि इमारत का मालिक हो या जिम्मेदार अधिकारी, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री सहित तमाम बड़े नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। राष्ट्रपति और पीएम ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

पुलिस की जांच और इमारत की सच्चाई प्रारंभिक सूचना के अनुसार, इस इमारत का नाम हॉस्टल डेज था, जिसका मालिक गुरुग्राम का निवासी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था, जिससे नींव कमजोर हो गई थी। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मालिक की तलाश के लिए सात से आठ टीमों को तैनात किया गया है।

एम्स ट्रॉमा सेंटर में रेस्क्यू का अपडेट घटनास्थल से घायलों को तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां दिल्ली की स्वास्थ्य टीमें और डॉक्टर इलाज में जुटे हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान मलबे के नीचे दबे बाकी लोगों को सुरक्षित निकालने पर केंद्रित है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर रात भर डटी हुई है, ताकि हर एक छात्र तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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