पंजाब की राजनीति में अपराध के दागों का एक लंबा इतिहास है। इसी कड़ी में गैंगस्टर से नेता बने गुरप्रीत सिंह सेखों का आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है। फिरोजपुर के जीरा में मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में सेखों ने पार्टी का दामन थामा है, जो पंजाब में अपराधियों के मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश करने के ट्रेंड को फिर से हवा दे रहा है।
राजनीति में सक्रिय परिवार का बैकग्राउंड फिरोजपुर के मुदकी गांव के निवासी गुरप्रीत सेखों का परिवार पहले कांग्रेस से जुड़ा रहा है। हालांकि, सेखों की सियासी महत्वाकांक्षा नई नहीं है। उनकी दोनों पत्नियां- मनदीप कौर और कुलजीत कौर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के टिकट पर जिला परिषद चुनाव जीत चुकी हैं। सेखों की गिरफ्तारी और फिर रिहाई के बाद उनके समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी, जिसे अब विनेबिलिटी (जीतने की क्षमता) के तौर पर देखा जा रहा है।
पंजाब के डॉन और उनकी सियासी विरासत सेखों कोई पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने अपराध की दुनिया से राजनीति का रुख किया है। पंजाब के पहले बड़े गैंगस्टर माने जाने वाले फरीदकोट के प्रभजिंदर सिंह बराड़ उर्फ डिम्पी चांदभान का सीधा जुड़ाव सिमरनजीत सिंह मान की शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) से था। उग्रवाद के दौर और पुलिस कार्रवाई के बीच उनकी सियासी महत्वाकांक्षाएं खत्म हो गईं और 2006 में उनकी हत्या कर दी गई।
रॉकी फाजिल्का का चुनावी सफर डिम्पी के सहयोगी रहे जसविंदर सिंह भुल्लर उर्फ रॉकी फाजिल्का ने भी राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में वह मात्र 1,700 वोटों से चुनाव हार गए थे। रॉकी की मौत के बाद उनकी बहन राजदीप कौर ने सियासी विरासत संभाली और निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए 38,000 वोट हासिल किए। बाद में वह शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गईं।
गैंगस्टर परिवार और वर्तमान स्थिति सिर्फ गुरप्रीत सेखों ही नहीं, बल्कि अन्य गैंगस्टरों के परिवार भी राजनीति में अपनी पैठ बना रहे हैं। कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया की मौसी राजविंदर कौर मासी , वर्तमान में डेरा बाबा नानक ब्लॉक समिति की चेयरपर्सन हैं और विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
सिद्धांतों पर भारी जीतने की क्षमता राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पंजाब में अपराध अब राजनीति के लिए बाधा नहीं, बल्कि एक संसाधन बन गया है। पार्टियों के लिए सिद्धांत से ज्यादा विनेबिलिटी मायने रखती है। इसी कारण विवादित पृष्ठभूमियों वाले चेहरों को भी दलों में शामिल किया जा रहा है, ताकि चुनावों में जीत सुनिश्चित की जा सके। यह ट्रेंड पंजाब के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
*Former gangster turned politician Gurpreet Singh Sekhon joins the AAP. Punjab CM Bhagwant Mann inducted him into the party. Sekhon is likely to contest from the Zira in the coming elections.
— Ramandeep Singh Mann (@ramanmann1974) September 6, 2026
In today s times winnability is way more important than the so called principles ! pic.twitter.com/Hbral72jHa
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