दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पुरानी इमारत गिरने से हड़कंप मच गया। मोतीबाग के पास स्थित शिव मंदिर के समीप यह हादसा उस समय हुआ जब इमारत ढह गई। इस बिल्डिंग में पीजी (PG) चलाए जा रहे थे, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र रहते थे।
मलबे में फंसे हैं छात्र, राहत कार्य जारी हादसे के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी भी 25 से 26 छात्र दबे हो सकते हैं। राहत एवं बचाव दल मलबा हटाने का काम तेजी से कर रहे हैं। अब तक तीन छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि तीन अन्य की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे में एक व्यक्ति की मौत की भी पुष्टि हुई है।
देरी से पहुंची मदद : हुड्डा का प्रशासनिक तंत्र पर वार घटनास्थल पर पहुंचे कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने राहत कार्य में देरी को लेकर प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद पुलिस और एंबुलेंस को मौके पर पहुंचने में काफी वक्त लगा। हुड्डा ने 31 मई को हुए साकेत हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार हो रहे ऐसे हादसे दिल्ली के जर्जर ढांचे और लचर प्रबंधन की पोल खोल रहे हैं।
राजनीति नहीं, बचाव प्राथमिकता हुड्डा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका मकसद राजनीति करना नहीं है। उन्होंने कहा, मैं यहां एक राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और एक इंसान के तौर पर आया हूं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बचाव कार्य पूरा होने के बाद इस घटना की पूरी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और संबंधित अधिकारियों से कड़ा जवाब मांगा जाएगा।
सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल बिल्डिंग गिरने के बाद एक बार फिर दिल्ली में फायर और बिल्डिंग सेफ्टी के नियमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। हुड्डा ने कहा कि एमसीडी (MCD) और एनडीएमसी (NDMC) जैसे संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आखिर असुरक्षित इमारतों में पीजी संचालन की अनुमति कैसे दी गई, यह एक बड़ा जांच का विषय है।
फिलहाल, स्थानीय प्रशासन और बचाव टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। स्थानीय विधायक भी मौके पर मौजूद हैं और छात्रों के परिजनों की ओर से आ रहे फोन कॉल्स के बाद स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
#WATCH | Delhi: On the Satya Niketan building collapse, Congress MP Deepender Singh Hooda says, This is not the time for a political blame game. This is the time for rescue. We are all engaged in the rescue operation, and our teams are working. There can be nothing more painful… pic.twitter.com/0ti2CW6tuD
— ANI (@ANI) September 6, 2026
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