ISRO के निजीकरण पर घमासान: 9 कर्मचारी संगठनों ने मोदी सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
News Image

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण को लेकर चल रही चर्चाओं ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। संगठन के भीतर पनप रहे असंतोष के बीच, ISRO के 9 प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन को पत्र लिखकर सरकार की भविष्य की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।

निजीकरण पर पहली बार खुलकर विरोध भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने के छह साल बाद यह पहला मौका है, जब इतने बड़े स्तर पर कर्मचारियों ने खुलकर चिंता जाहिर की है। ISRO स्टाफ एसोसिएशन, SHAR एम्प्लॉइज एसोसिएशन और LPSC समेत 9 संघों ने इस बदलाव की दिशा और अपने भविष्य को लेकर लिखित स्पष्टीकरण की मांग की है।

क्या हम सिर्फ रिसर्च तक सीमित रहेंगे? कर्मचारी संगठनों ने सरकार से दो टूक पूछा है कि क्या दशकों की मेहनत से बनाई गई ISRO की क्षमताओं को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। उनका तर्क है कि निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के नाम पर ISRO की भूमिका को जानबूझकर सीमित किया जा रहा है। यूनियनों ने पूछा है कि क्या भविष्य में रॉकेट और उपग्रह निर्माण में ISRO की कोई भूमिका नहीं रहेगी?

लॉन्च वाहनों का भविष्य दांव पर? विरोध की मुख्य वजह इन-स्पेस (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन गोयनका का हालिया बयान है। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि ISRO भविष्य में किसी भी लॉन्च वाहन का निर्माण नहीं करेगा। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या यह कोई आधिकारिक नीतिगत फैसला है। उन्होंने PSLV, LVM-3 और SSLV जैसे महत्वपूर्ण वाहनों के डिजाइन, परीक्षण और लॉन्चिंग को निजी कंपनियों को सौंपने की चर्चा पर भी अपना संदेह जताया है।

ISRO चीफ का क्या है पक्ष? दूसरी ओर, आलोचनाओं के बीच ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए स्पेस इकोसिस्टम का विस्तार अनिवार्य है। उन्होंने कहा, ISRO अकेले देश की सभी जरूरतें पूरी नहीं कर सकता। फिलहाल हमारे पास 56 सैटेलाइट हैं, जबकि देश को सैकड़ों की आवश्यकता है। स्पेस इकोसिस्टम का बढ़ना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।

सियासी गलियारों में भी उबाल इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि सरकार उन क्षमताओं को निजी कंपनियों को सौंप रही है जिन्हें ISRO ने दशकों की मेहनत से बनाया है। उन्होंने निजी कंपनियों की लंबी अवधि की प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान करने के लिए कोई आधिकारिक श्वेत पत्र (White Paper) जारी करेगी या नहीं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

राजस्थान में आज फिर बिगड़ेगा मौसम: कोटा-भरतपुर में भारी बारिश का अलर्ट, जानें आपके जिले का हाल

Story 1

दिलीप ट्रॉफी फाइनल: तिलक वर्मा और 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के बीच मैदान पर घमासान, मुक्केबाजी तक पहुंची बात

Story 1

पटना यूनिवर्सिटी में शिक्षक दिवस पर धमाका: परिसर में फेंका गया देसी बम, जांच में जुटी पुलिस

Story 1

झारखंड को बड़ा झटका: नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन

Story 1

समुद्र में बिछी लाशें: अमेरिकी मिसाइल हमलों से कैसे तबाह हुए ईरान के तेल टैंकर?

Story 1

नीशु आजाद के घर पर मंडराया खतरा: पत्थरबाजी और धमकी के बाद पुलिस से मांगी सुरक्षा

Story 1

एयर शो में मौत का मंजर: करतब दिखाते हुए गिरा F-4 फैंटम फाइटर जेट, दोनों पायलटों की दर्दनाक मौत

Story 1

राम मंदिर को मिला नया प्रशासनिक नेतृत्व: एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र संभालेंगे कमान

Story 1

तीन चूल्हे, तीन सिलेंडर और अलग-अलग साबुन: रूममेट्स का यह किचन मैनेजमेंट देख चकरा जाएगा आपका सिर!

Story 1

इंडोनेशिया में क्राकाटोआ का रौद्र रूप: 50,000 फीट ऊंची राख से थमा हवाई यातायात, हजारों यात्री बेहाल