पालघर: महाराष्ट्र के पालघर स्थित राहत अस्पताल में शनिवार रात जमकर हंगामा हुआ। दही हांडी कार्यक्रम के दौरान घायल हुए युवकों के इलाज को लेकर अस्पताल प्रबंधन और शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला थाने तक पहुंच गया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव में न केवल स्टाफ के साथ मारपीट की गई, बल्कि जबरन मरीजों को अस्पताल से ले जाया गया।
अस्पताल के मालिक डॉ. विशाल कोडगीरकर के अनुसार, दही हांडी के दौरान घायल हुए 19 वर्षीय ओंकार कालवाडकर को सिर में गंभीर चोट के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने उसे 24 घंटे निगरानी में रखने की सख्त सलाह दी थी। हालांकि, दही हांडी टोली और शिवसेना कार्यकर्ता उसे तुरंत डिस्चार्ज कराने की जिद पर अड़ गए।
डॉक्टरों का आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने न केवल डिस्चार्ज की मांग की, बल्कि इलाज के बिल में भारी छूट का दबाव भी बनाया। अस्पताल ने 20% छूट दी थी, लेकिन समूह इससे भी कम भुगतान करना चाहता था। डॉ. कोडगीरकर ने बताया कि इस दौरान आईसीयू में घुसकर हंगामा किया गया, जिससे वहां भर्ती अन्य मरीज भी सहम गए। महिला डॉक्टरों के साथ भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।
अस्पताल के कर्मचारी विवेक बाबू झिंगा ने आरोप लगाया कि पालघर जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे और शहर प्रमुख राहुल घराट ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को धमकाया। झिंगा का आरोप है कि जब उन्होंने शांति बनाए रखने की अपील की, तो राहुल घराट ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। इतना ही नहीं, डर के कारण नर्सों को ओंकार की सलाइन लाइन जबरन हटानी पड़ी।
दूसरी ओर, जिला प्रमुख कुंदन सांखे ने इन आरोपों को गलत बताया। उन्होंने इसे छोटा सा मामला करार देते हुए कहा कि वे केवल घायलों का हाल जानने गए थे। उन्होंने 10,000 रुपये के भुगतान की बात स्वीकार की और दावा किया कि युवक ठीक था, लेकिन अस्पताल का स्टाफ ही अभद्रता कर रहा था। उन्होंने राहुल घराट द्वारा थप्पड़ मारने की घटना को खारिज नहीं किया।
इस घटना पर एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता महेश तपासे ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे चिकित्सा व्यवस्था पर हमला करार देते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं को मिल रहा राजनीतिक संरक्षण ही ऐसी घटनाओं का कारण है। तपासे ने इसे कानून व्यवस्था की विफलता बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर जांच कर रही है। हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिसे लेकर मेडिकल स्टाफ में गहरा रोष है।
ShivSena functionaries create ruckus at Palghar hospital
— Suhas Birhade ↗️ (@Suhas_News) September 6, 2026
Over treatment of an injured Govinda team member, doctors and staff were allegedly abused and threatened with vandalism. A staffer was also allegedly assaulted. A case has been registered against 17 pic.twitter.com/DbYyi2dh8T
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