पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने एक हालिया पॉडकास्ट साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव और राजनीतिक सफर पर खुलकर बात की। इस दौरान स्मृति ने पीएम मोदी पर होने वाले हमलों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।
वे मेरे पिता की उम्र के हैं साक्षात्कार के दौरान पीएम मोदी के कार्य समर्पण का जिक्र करते हुए स्मृति भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, जिस व्यक्ति की मां का निधन हुआ, वह अंतिम संस्कार के बाद भी तुरंत वंदे भारत को हरी झंडी दिखाने पहुंच गए। उन्होंने कोई बड़ा आयोजन कर नेताओं की भीड़ नहीं जुटाई। स्मृति ने स्पष्ट लहजे में कहा कि पीएम मोदी उनके पिता की उम्र के हैं। ऐसे में अगर कोई उनके पिता समान मोदी के सम्मान या उनके गिरेबान तक हाथ पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसे रोकना उनकी जिम्मेदारी है।
सरदार सरोवर बांध का उदाहरण स्मृति ने पीएम मोदी के संकल्प को समझाने के लिए सरदार सरोवर परियोजना का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि दशकों से अटकी इस परियोजना को गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने आगे बढ़ाया। स्मृति के अनुसार, 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने महज 17 दिनों में बांध की ऊंचाई बढ़ाने की मंजूरी दी, जिससे चार करोड़ लोगों को पानी मिला।
अमेठी हार के बाद संगठन में वापसी 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हारने के बाद स्मृति ईरानी कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। हालांकि, अगस्त 2026 में बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें महासचिव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 2003 में महाराष्ट्र युवा मोर्चा से शुरू हुआ उनका सफर आज यहां तक पहुंचना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
मोदी ने इग्नोर किया वाले वीडियो पर सफाई हाल ही में वायरल हुए उस वीडियो पर भी उन्होंने जवाब दिया जिसमें पीएम मोदी उन्हें बिना देखे आगे बढ़ते दिख रहे थे। स्मृति ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री की पीठ की तरफ थीं, ऐसे में उनका अभिवादन देख पाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि उस पल में बंगाल के कार्यकर्ताओं का संघर्ष उनके लिए अधिक मायने रखता था।
आलोचना और ट्रोलिंग पर दो टूक सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग को लेकर स्मृति ने संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने सीखा है कि हर टिप्पणी का जवाब देना आवश्यक नहीं है। उनके अनुसार, केवल उन्हीं आलोचनाओं पर ध्यान देना चाहिए जिनमें सुधार की गुंजाइश हो, बाकी को नजरअंदाज करना ही बेहतर है।
*नाविका:- (मोदी जी के काम पर सवाल)
— Braj Shyam Maurya (@brijshyam8) September 6, 2026
स्मृति ईरानी:- ये आदमी इसकी मां मर गई 😳
वंदे-भारत को झंडा दिखाने चला गया, क्या बात कर रहे है आप, दाह संस्कार के बाद
इन्होने बडी एक सभा करके नेताओ को इकट्ठा नही किया... मेरी पित की उम्र का है
मेरे बाप के गिरेबान तक आपका हाथ पहुचा है तो ये… pic.twitter.com/LwKZN2tv8E
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