मेरे पिता के गिरेबान तक हाथ पहुंचा तो... , पीएम मोदी के लिए क्यों भावुक हुईं स्मृति ईरानी?
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पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी राजनीतिक सक्रियता नहीं, बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी के लिए उनका भावुक अंदाज है। एक हालिया इंटरव्यू में स्मृति ने न केवल पीएम मोदी के कामकाज की तारीफ की, बल्कि उन पर हो रहे हमलों को लेकर अपना कड़ा रुख भी स्पष्ट किया।

वह मेरे पिता की उम्र के हैं

इंटरव्यू के दौरान स्मृति ईरानी काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने पीएम मोदी के निजी संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा, जिस आदमी की मां का निधन हुआ, वह अंतिम संस्कार के तुरंत बाद वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने पहुंच गए। उन्होंने कोई दिखावटी सभा नहीं की। वे मेरे पिता की उम्र के हैं। अगर कोई उनके गिरेबान तक हाथ पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसमें मेरी भी गलती है।

स्मृति का यह बयान पीएम मोदी पर विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे राजनीतिक हमलों के संदर्भ में था। उन्होंने कहा कि 24 साल से मोदी को करीब से देखने के बाद, उनका बचाव करना अब उनकी जिम्मेदारी बन गई है।

सरदार सरोवर बांध के बहाने मोदी के विजन का जिक्र

स्मृति ने पीएम मोदी की कार्यक्षमता को समझाने के लिए सरदार सरोवर परियोजना का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि दशकों से अटकी इस परियोजना को मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए आगे बढ़ाया। स्मृति के अनुसार, 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने महज 17 दिनों में बांध की ऊंचाई बढ़ाने की मंजूरी दी, जिससे करोड़ों लोगों को लाभ मिला।

इग्नोर करने वाले वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया गया था कि पश्चिम बंगाल में एक मंच पर पीएम मोदी ने स्मृति ईरानी को नजरअंदाज कर दिया था। इस पर स्मृति ने सफाई देते हुए कहा, वह प्रधानमंत्री की पीठ थी, उन्हें कैसे पता चलता कि कौन हाथ जोड़कर अभिवादन कर रहा है? उन्होंने कहा कि उस पल में वह खुद बंगाल के कार्यकर्ताओं के संघर्ष को याद कर भावुक थीं, न कि किसी निजी उपेक्षा के कारण।

राजनीतिक सफर और नई भूमिका

अमेठी चुनाव में हार और उसके बाद के दो साल के अंतराल पर बात करते हुए स्मृति ने कहा कि पद उनकी पहचान नहीं है। 2003 में महाराष्ट्र युवा मोर्चा से शुरू हुआ उनका सफर आज बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव तक पहुंच चुका है। उन्होंने माना कि सार्वजनिक जीवन में 25 साल बिताने के बाद उन्हें समझ आ गया है कि हर ट्रोलिंग का जवाब देना जरूरी नहीं है।

अब स्मृति ईरानी संगठन में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि बीजेपी के भीतर मोदी और उनके वरिष्ठ सहयोगियों के बीच का रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सम्मान और अटूट विश्वास का भी है।

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