नदी साफ की तो मिली दुनिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी: बिट्टू तबाही को मिला ग्लोबल CEO का जॉब ऑफर
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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले 20 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर बिट्टू तबाही के नाम से जाना जाता है, इन दिनों वैश्विक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। महीनों तक अकेली दम पर अजनी नदी की सफाई करने वाले बिट्टू को अब एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी से नौकरी का बड़ा ऑफर मिला है।

सोशल मीडिया पर तीन शब्दों का जादू बिट्टू अपने सफाई अभियान के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। हाल ही में उनके काम को लेकर X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें नदी की सफाई से पहले और बाद का अंतर दिखाया गया था।

इस पोस्ट पर द ओशन क्लीनअप (The Ocean Cleanup) के संस्थापक और सीईओ बॉयन स्लैट की नजर पड़ी। उन्होंने बिट्टू की मेहनत से प्रभावित होकर सिर्फ तीन शब्द लिखे: Come work for us (हमारे साथ काम करने आओ)। इस छोटे से कमेंट ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।

जनवरी से जारी है तबाही सफाई अभियान सुरेंद्र उर्फ बिट्टू ने इसी साल जनवरी में अजनी नदी को कचरा मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया था। बिना किसी सरकारी मदद के, वे अकेले नदी से प्लास्टिक, जलकुंभी और जमा गंदगी निकालते रहे। इस काम में उन्होंने अब तक करीब 30 हजार रुपये अपनी जेब से खर्च किए हैं। आज उनकी मेहनत का असर नदी के उन हिस्सों में साफ दिखाई देता है, जो कभी कचरे के ढेर हुआ करते थे।

आनंद महिंद्रा भी हो चुके हैं कायल बिट्टू की इस पहल को पहले भी बड़ी पहचान मिल चुकी है। मार्च के महीने में उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनके काम की जमकर तारीफ की थी। जब कुछ लोगों ने उनके अभियान को केवल लाइक्स बटोरने का जरिया बताया, तब महिंद्रा ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें अपना #MondayMotivation करार दिया था।

कौन हैं बॉयन स्लैट और द ओशन क्लीनअप ? बॉयन स्लैट नीदरलैंड्स के एक प्रख्यात आविष्कारक और उद्यमी हैं। उनकी संस्था द ओशन क्लीनअप दुनिया भर में नदियों और समुद्रों से प्लास्टिक प्रदूषण हटाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करती है। एक ग्लोबल एनवायरमेंटल संस्था द्वारा बिट्टू के जमीनी स्तर के काम को पहचानना, उनके समर्पण की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।

अब आगे क्या? एक छोटे शहर के युवा का बिना किसी टीम के नदी को नया जीवन देना और फिर सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नोटिस किया जाना प्रेरणादायक है। अब हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि क्या बिट्टू इस शानदार करियर अवसर को स्वीकार करेंगे? फिलहाल, यह घटना इच्छाशक्ति की ताकत का जीता-जागता उदाहरण बन गई है।

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