बच्चों का बचपन बचाइए, टैलेंट को पहचानिए : शिक्षक दिवस पर PM मोदी का शिक्षकों को बड़ा संदेश
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शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा की पारंपरिक परिभाषा से हटकर एक नई दृष्टि पेश की है। नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले 82 शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए पीएम ने कहा कि एक शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के संपूर्ण विकास और उनके बचपन को सुरक्षित रखने में भी है।

व्यवहार पर रखें पैनी नजर प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि वे बच्चे के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके व्यवहार पर भी बारीकी से नजर रखें। उन्होंने कहा कि यदि बच्चा अचानक दोस्तों से कटने लगे, गुमसुम रहे या उसके स्वभाव में कोई असामान्य बदलाव दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें। शिक्षक को ऐसे संकेतों के पीछे की वजह जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर अभिभावकों से चर्चा कर बच्चे को सही राह दिखानी चाहिए।

स्क्रीन टाइम और नशे की चुनौती आज के दौर में मोबाइल और देर रात तक स्क्रीन का उपयोग एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि वे माता-पिता को जागरूक करें और बच्चों को स्क्रीन से दूर कर शारीरिक गतिविधियों, खेलों और रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करें। इसके अलावा, उन्होंने नशीले पदार्थों के प्रति भी शिक्षकों को सतर्क रहने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यवहार में आया कोई भी बड़ा बदलाव अनुशासनहीनता ही नहीं, बल्कि किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

किताबों से परे वास्तविक दुनिया की सीख प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पढ़ाई को सिर्फ क्लासरूम की चार दीवारों तक सीमित न रखें। बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा को दबाने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने और उनमें श्रम की गरिमा जैसे संस्कार विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों के कम होने के कारण अब बच्चों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

82 शिक्षकों का सम्मान इस वर्ष नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए चुने गए 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स में 48 स्कूल शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षक और 13 स्किल ट्रेनर शामिल हैं। अवॉर्ड समारोह के दौरान शिक्षकों ने अपने अभिनव शिक्षण प्रयोगों को भी साझा किया।

प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट है—बच्चों की सफलता का पैमाना केवल परीक्षा में मिले नंबर नहीं, बल्कि उनका मानसिक स्वास्थ्य, उनकी आदतें और उनका आत्मविश्वास है। शिक्षक इन सभी पहलुओं के बीच एक सेतु बनकर बच्चों को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।

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