कैराना सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट: सहारनपुर मस्जिद विवाद पर क्यों गरमाई सियासत?
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर उपजा विवाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है। जिला न्यायालय द्वारा मस्जिद को अवैध घोषित करने के फैसले के बाद प्रशासन की सख्त कार्रवाई और सपा सांसद इकरा हसन के हाउस अरेस्ट ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है।

इकरा हसन का दावा: क्या जनहित की आवाज उठाना अपराध है?

कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की तैयारी में थीं, ताकि वहां के अधिकारियों से मिलकर जनता का पक्ष रख सकें। इसी दौरान पुलिस ने उनके आवास को घेर लिया और उन्हें घर में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया।

इकरा हसन ने आक्रोश जताते हुए प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया है। सांसद का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि को जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से मिलने से रोकना लोकतंत्र में गलत है और सरकार इस तरह जनता की आवाज नहीं दबा सकती।

पुलिस और प्रशासन की रणनीति क्या है?

प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए इकरा हसन को बाहर निकलने से रोका है। माना जा रहा है कि मस्जिद विवाद के चलते क्षेत्र में किसी भी तरह की भीड़ न जुटे और कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए पुलिस कड़ी निगरानी रख रही है।

तनाव को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, मस्जिद के संभावित ध्वस्तीकरण की चर्चाओं के बाद से पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन फिलहाल संवेदनशीलता बरतते हुए किसी भी विरोध प्रदर्शन को रोकने के मूड में है।

इमरान मसूद ने की शांति की अपील

इस पूरे प्रकरण पर सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ने संयम बरतने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। मसूद ने कहा कि किसी भी प्रकार की भड़काऊ बयानबाजी से बचें। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि मस्जिद मामले में न्याय के लिए अब हाई कोर्ट का रुख किया जाएगा, ताकि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसका हल निकल सके।

कलेक्ट्रेट में रात भर चला हलचल का दौर

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एमएलसी शाहनवाज खान और कई पार्षद रात में ही जिलाधिकारी के आवास पर पहुंच गए थे। उन्हें सूचना मिली थी कि प्रशासन रात के अंधेरे में मस्जिद गिराने की कार्रवाई कर सकता है।

शाहनवाज खान ने प्रशासन से आग्रह किया है कि जब तक उच्च न्यायालय से कोई स्पष्ट निर्देश न मिल जाए, तब तक कोई भी ध्वस्तीकरण या तोड़फोड़ न की जाए। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सबकी निगाहें अब अदालती फैसलों और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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