पाकिस्तान में नए प्रशासनिक प्रांत बनाने की कवायद ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने साफ कर दिया है कि सिंध का विभाजन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे पर शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर को कड़ी चेतावनी दी है।
सिंध असेंबली का कड़ा रुख सिंध असेंबली ने प्रांत को बांटने के किसी भी प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कहा कि नेशनल असेंबली को सिंध के बंटवारे पर चर्चा करने की हिम्मत भी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने इसे एक गंभीर चेतावनी करार देते हुए कहा कि जो काम तानाशाह जिया उल हक ने भी नहीं किया, उसे आज की सरकार करने की कोशिश कर रही है।
गठबंधन में दरार! यह विवाद शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ा संकट बन सकता है क्योंकि उनकी सरकार पीपीपी के समर्थन पर टिकी है। पीपीपी नेतृत्व, विशेष रूप से आसिफ अली जरदारी और बिलावल भुट्टो इस प्रस्ताव से बेहद नाराज हैं। सिंध की क्षेत्रीय अखंडता पर पीपीपी कोई समझौता करने को तैयार नहीं है, जो संघीय सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
लंदन में डेरा जमाए बैठे हैं जरदारी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी नए प्रांतों के मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताने के लिए लंदन चले गए हैं। उन्हें मनाने के लिए गृह मंत्री मोहसिन नकवी को भेजा गया, जो सेना प्रमुख मुनीर के अति करीबी माने जाते हैं। बताया जा रहा है कि जरदारी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रांतों का बंटवारा करना ही है, तो इसकी शुरुआत पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा से होनी चाहिए, सिंध और बलूचिस्तान को इसमें अभी शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक अस्तित्व पर खतरा पीपीपी के लिए सिंध उसका सबसे मजबूत गढ़ है। पार्टी को डर है कि अगर सिंध का विभाजन हुआ, तो उसका राजनीतिक प्रभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। वहीं, बलूचिस्तान पहले से ही उग्रवाद और अस्थिरता से जूझ रहा है, जहां नए प्रांत का मुद्दा आग में घी का काम कर सकता है। जरदारी की यह चुप्पी और नाराजगी पाकिस्तान के मौजूदा सत्ता समीकरण के लिए एक बड़े राजनीतिक विस्फोट का संकेत दे रही है।
We must warn the National Assembly not to even discuss the division of Sindh. Consider this a warning.
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) September 4, 2026
A dictator introduced this in the 8th Amendment; we should have abolished it through the 18th Amendment.
What they are trying to do is something even Zia did not have the… pic.twitter.com/RG246znYXg
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