पश्चिमी यूपी में क्या फिर बदलेगा चौधरी परिवार का सियासी समीकरण? स्वाभिमान रैली के गहरे मायने
News Image

उत्तर प्रदेश में फरवरी-मार्च 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बिसात अभी से बिछने लगी है। इस सियासी हलचल के बीच, पश्चिमी यूपी के सहारनपुर में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) द्वारा आयोजित स्वाभिमान रैली ने राज्य की राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है।

चवन्नी वाले बयान का पलटवार

सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा जयंत चौधरी को चवन्नी (पलटी मारने वाला) कहे जाने से आरएलडी आहत है। स्वाभिमान रैली को इसी अपमान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। जयंत चौधरी ने मंच से चौधरी चरण सिंह की विरासत को याद करते हुए इसे किसान, मजदूर और जाट समाज के स्वाभिमान से जोड़ दिया है।

चौधरी परिवार का रसूख और विरासत

चौधरी चरण सिंह ने 1929 से जिस राजनीतिक नींव को रखा था, वह आज भी पश्चिमी यूपी में एक मजबूत धुरी है। किसान-हितैषी नीतियों, जमींदारी उन्मूलन अधिनियम और गैर-कांग्रेस राजनीति के माध्यम से वे किसानों के मसीहा बने। उनके निधन के बाद चौधरी अजित सिंह और अब जयंत चौधरी इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। चारू चौधरी का सक्रिय राजनीति में आना आरएलडी के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

बदलता सियासी गणित

पश्चिमी यूपी में कभी जाट-मुस्लिम और जाट-यादव समीकरण का दबदबा था, जो अब बदल रहा है। सपा से अलग होने के बाद जयंत चौधरी अब एनडीए के साथ मिलकर नए सामाजिक समीकरण बुन रहे हैं। त्यागी और ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए केसी त्यागी जैसे नेताओं को आगे करना इसी रणनीति का हिस्सा है।

मुस्लिम वोटर: एक निर्णायक फैक्टर

पश्चिमी यूपी में 26% से अधिक मुस्लिम आबादी है। 8 प्रमुख जिले ऐसे हैं जहां मुस्लिम वोट हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जनसंख्या के बढ़ते आंकड़ों के बीच यह क्षेत्र राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

रैली का असली मकसद क्या है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रैली के जरिए जयंत चौधरी दो संदेश दे रहे हैं:

  1. भाजपा के लिए: एनडीए गठबंधन में आरएलडी अपनी मजबूत दावेदारी और अपनी जमीन की ताकत का एहसास कराना चाहती है, ताकि सीट बंटवारे में पार्टी को सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले।
  2. कार्यकर्ताओं के लिए: अपने वजूद को स्वाभिमान से जोड़कर पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना।

अब सवाल यह है कि क्या आरएलडी का यह नया सोशल इंजीनियरिंग प्रयोग 2027 के महासंग्राम में पुरानी विरासत के साथ न्याय कर पाएगा? इसका जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

यूरोप को पीएम मोदी की चेतावनी समझ आई: क्या अब सच का सामना कर पाएगा यूक्रेन?

Story 1

दासुन शनाका का तूफानी शतक: 39 गेंदों में रचा इतिहास, सीपीएल में टूटे कई बड़े रिकॉर्ड

Story 1

मिर्जापुर द मूवी: बड़े पर्दे पर कालीन भैया का भौकाल या सिर्फ वेब सीरीज का विस्तार? जानें क्या है पब्लिक का फैसला

Story 1

ट्रेन टिकट बुकिंग में एक छोटी सी गलती पड़ेगी भारी, IRCTC ने जारी की चेतावनी

Story 1

हनुमान अंश के गायक सुनील लोधी पर मेहरबान CM मोहन यादव, 1 लाख की मदद और आंखों के इलाज का जिम्मा

Story 1

दिल्ली एयरपोर्ट पर जल-प्रलय : भारी बारिश ने IGI टर्मिनल-3 को बनाया तालाब, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

Story 1

संसद मार्ग थाने के बाहर बवाल: स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर गरमाई सियासत, पप्पू यादव और चंद्रशेखर आजाद पहुंचे

Story 1

एशियन गेम्स 2026: रसीख सलाम की टीम इंडिया में धमाकेदार एंट्री, नेट बॉलर के रूप में मिली बड़ी जिम्मेदारी

Story 1

खुद को आईने में देखो... : जेसन गिलेस्पी का आकिब जावेद पर तीखा प्रहार, पाकिस्तान क्रिकेट में मचा घमासान

Story 1

हनुमान अंश के भजन की गूँज: रातों-रात स्टार बने दृष्टिबाधित सिंगर सुनील लोधी, जानें किसे दिया सफलता का श्रेय