संसद मार्ग थाने के बाहर बवाल: स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर गरमाई सियासत, पप्पू यादव और चंद्रशेखर आजाद पहुंचे
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दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट का मामला अब एक नए विवाद में बदल गया है। शुक्रवार को CJP के सैकड़ों कार्यकर्ता संसद मार्ग थाने के बाहर जमा हो गए और आरोपी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

वायरल पॉडकास्ट ने फिर सुलगाई आग विवाद की जड़ स्वतंत्र भारद्वाज का एक वायरल पॉडकास्ट है। इसमें भारद्वाज ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने निशू आजाद के पिता संजय कुमार के सिर पर वार किया था। वीडियो में उन्होंने प्रभावशाली राजनीतिक संपर्कों का हवाला देते हुए जेल न जाने का दावा भी किया, जिससे विपक्षी नेताओं और CJP कार्यकर्ताओं का आक्रोश भड़क गया।

विपक्ष का मोर्चा: पप्पू यादव और चंद्रशेखर आजाद की एंट्री प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और गर्मा गया जब आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद और सांसद पप्पू यादव थाने पहुंचे। नेताओं की मौजूदगी से थाने के बाहर समर्थकों की भीड़ बढ़ गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पप्पू यादव ने इस घटना को दलितों और विरोधियों पर सुनियोजित हमला करार दिया।

स्वतंत्र भारद्वाज का पलटी मारना विवाद बढ़ने पर स्वतंत्र भारद्वाज ने सफाई देते हुए इसे आत्मरक्षा का नाम दिया है। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर उन्हें 10-15 लोगों ने घेर लिया था, और खुद को बचाने के लिए की गई कार्रवाई में संजय आजाद को चोट लगी। भारद्वाज का कहना है कि उनके पास वीडियो सबूत हैं और वे पुलिस जांच में सहयोग कर रहे हैं।

CJP की मांग: हत्या के प्रयास का केस दर्ज हो CJP प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने पुलिस की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जंतर-मंतर पर 2,800 लोगों की पहचान के बावजूद अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? संगठन की मांग है कि भारद्वाज के वायरल दावों के आधार पर उन पर हत्या के प्रयास (Attempt to murder) जैसी गंभीर धाराएं लगाई जाएं।

क्या है दिल्ली पुलिस का रुख? डीसीपी सचिन शर्मा ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में संजय आजाद की चोटें सामान्य (Simple in nature) पाई गई हैं। पुलिस के अनुसार, किसी हथियार के बजाय चोट कड़ा लगने से आई थी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि खोपड़ी में फ्रैक्चर का दावा गलत है। साथ ही, पुलिस ने किसी भी राजनीतिक दबाव से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है और जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

फिलहाल, पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट और कार्यकर्ताओं के दावों के बीच का अंतर इस मामले को एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई की दिशा में ले जा रहा है।

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