यूरोप को पीएम मोदी की चेतावनी समझ आई: क्या अब सच का सामना कर पाएगा यूक्रेन?
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यूरोप इस वक्त एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक भूल के परिणामों को भुगत रहा है। एक तरफ अमेरिका के टैरिफ हमलों का डर है, तो दूसरी तरफ चीन का जाल है। जब यूरोप अपनी आंखें मूंदकर चीन पर निर्भरता बढ़ा रहा था, तब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आगाह किया था। आज जब ड्रैगन का शिकंजा यूरोप की गर्दन तक पहुंच चुका है, तो उन्हें भारत के उस विजन की अहमियत समझ आ रही है।

बेल्जियम के पीएम का कबूलनामा: हमने मोदी की बात नहीं सुनी

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने दुनिया के सामने एक बड़ी हकीकत स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने यूरोप को बहुत पहले ही चेतावनी दी थी कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को हथियार बनाया जा सकता है। बार्ट डी वेवर ने स्पष्ट किया कि तब यूरोप ने भारत की बात को नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन अब वे समझ रहे हैं कि भारत का कूटनीतिक दृष्टिकोण कितना सटीक था।

चीन वाला ब्लंडर जिसने यूरोप की कमर तोड़ी

यूरोप ने पर्यावरण को बचाने की होड़ में चीन को अपनी सप्लाई चेन का केंद्र बना लिया। उन्हें लगा कि चीन सिर्फ एक सस्ता मैन्युफैक्चरिंग हब है, लेकिन असल में चीन ने यूरोप की पूरी इंडस्ट्री पर कब्जा कर लिया:

ट्रंप की टैरिफ नीति और यूरोप की छटपटाहट

यूरोप अब दोधारी तलवार पर खड़ा है। एक तरफ चीन का सस्ता और डंप किया हुआ माल उनकी स्थानीय इंडस्ट्री को खत्म कर रहा है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से अमेरिका का बाजार भी असुरक्षित हो गया है। बेल्जियम के पीएम ने संकेत दिया है कि यूरोप अब ऐसे भरोसेमंद साथियों की तलाश कर रहा है जो दबाव के लिए टैरिफ का इस्तेमाल न करें। उनके अनुसार, इस सूची में भारत सबसे ऊपर है।

यूक्रेन कब समझेगा यह बड़ा सबक?

यूक्रेन का भविष्य अभी भी पश्चिमी देशों के वादों पर टिका है। यूक्रेन यह देखने में विफल रहा है कि जिन देशों पर वह भरोसा कर रहा है, वे खुद अपनी तकनीक और ऊर्जा के लिए चीन जैसे देशों के मोहताज हैं।

पीएम मोदी ने हमेशा आत्मनिर्भरता और संतुलित कूटनीति की वकालत की है। यदि यूक्रेन अब भी सिर्फ दूसरों के इशारों पर चलता रहा और भारत के निष्पक्ष मॉडल से सबक नहीं लिया, तो युद्ध के बाद भी उसे अपनी अर्थव्यवस्था को पैरों पर खड़ा करने में भारी संघर्ष करना पड़ेगा।

भारत: भरोसे का नया केंद्र

यूरोप का भारत की ओर झुकना कोई संयोग नहीं है। भारत ने कभी भी अपनी सप्लाई चेन या आर्थिक नीतियों को किसी के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत की दूरदर्शी सोच आज वैश्विक राजनीति का आधार बन रही है। यूरोप के लिए अब चीन का विकल्प सिर्फ और सिर्फ भारत है।

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