क्रिकेट का Age Scam एक्सपोज्ड: बंगाल के 60 से ज्यादा खिलाड़ियों और स्टार्स की खुली पोल
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उम्र छुपाकर खेलने वाले क्रिकेटरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (CAB) के 60 से अधिक खिलाड़ियों को फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। इस फैसले ने भारतीय घरेलू क्रिकेट की नींव हिला दी है।

कैसे सामने आया यह बड़ा घोटाला?

यह मामला तब खुला जब बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन ने आगामी सीजन के लिए दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की। वेरिफिकेशन के दौरान खिलाड़ियों के स्कूल सर्टिफिकेट, जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के डेटा का मिलान किया गया।

जांच में कई क्रिकेटरों के सरकारी कागजातों में उनकी असली उम्र और दर्ज उम्र के बीच भारी अंतर पाया गया। गड़बड़ी साबित होते ही CAB ने संदिग्ध खिलाड़ियों की सूची BCCI को सौंपी, जिसके बाद बोर्ड ने तुरंत प्रभाव से इन सभी को बैन कर दिया।

एक खिलाड़ी के तीन जन्म प्रमाण पत्र

इस फर्जीवाड़े में सबसे चौंकाने वाला नाम अंडर-19 टीम के लेग स्पिनर रोहित यादव का है। जांच में उनके नाम पर तीन अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र (2007, 2009 और 2010 के वर्ष वाले) मिले। इतना ही नहीं, उनके आधार कार्ड और स्कूल रिकॉर्ड में भी गंभीर जालसाजी पाई गई। रोहित को अब 2 साल के कड़े प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा।

वर्ल्ड कप विजेता रवि कुमार भी लपेटे में

प्रतिबंधित खिलाड़ियों की सूची में 2022 का अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के तेज गेंदबाज रवि कुमार का नाम शामिल होना सबसे बड़ा झटका है। रिकॉर्ड्स की जांच में रवि के दस्तावेजों में 45 महीने यानी लगभग पौने चार साल का हेरफेर पाया गया है। इनके अलावा फर्स्ट क्लास ऑलराउंडर विशाल भाटी पर भी गाज गिरी है।

क्या है खिलाड़ियों की सजा?

दोषी पाए गए सभी 62 से 64 खिलाड़ियों को 2026-27 और 2027-28 के आगामी दो घरेलू सीजनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस दौरान ये खिलाड़ी न तो किसी टीम से जुड़ पाएंगे, न ही बीसीसीआई के किसी भी जूनियर या सीनियर टूर्नामेंट में भाग ले सकेंगे। उनका किसी भी तरह का ट्रांसफर भी वर्जित कर दिया गया है।

BCCI का एंटी-एज फ्रॉड मिशन और कड़े नियम

उम्र के इस खेल को जड़ से खत्म करने के लिए बोर्ड ने अब कमर कस ली है। अब केवल कागजों पर निर्भर रहने के बजाय प्रोफेशनल थर्ड-पार्टी एजेंसियां सीधे स्कूलों में जाकर रिकॉर्ड्स का भौतिक सत्यापन कर रही हैं।

भविष्य में पहचान बदलकर रजिस्ट्रेशन कराने से रोकने के लिए खिलाड़ियों का बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन) अनिवार्य किया जा रहा है। साथ ही, बोन-एज टेस्ट (TW3) को पहले से कहीं अधिक सख्त बना दिया गया है।

क्यों जरूरी था यह सख्त कदम?

भले ही एक साथ इतने खिलाड़ियों पर बैन लगने से बंगाल क्रिकेट प्रभावित हुआ है, लेकिन खेल की ईमानदारी बनाए रखने के लिए यह अनिवार्य था। उम्र छुपाकर खेलने वाले खिलाड़ी न केवल नियमों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वे उन ईमानदार प्रतिभाओं का हक छीनते हैं जो वास्तव में उस उम्र वर्ग के लिए योग्य हैं। BCCI का यह कड़ा रुख अब देश भर की क्रिकेट अकादमियों और खिलाड़ियों के लिए एक सख्त चेतावनी है।

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