स्वतंत्र भारद्वाज का कबूलनामा : जंतर-मंतर हमले पर मचा बवाल, कानूनी शिकंजे में फंसा मामला
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जंतर-मंतर पर 23 जून को हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी एक घटना ने अचानक से सियासी और कानूनी हलचल तेज कर दी है। खुद को इन्फ्लुएंसर बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान एक छात्र के पिता का सिर फोड़ दिया था।

विवाद की जड़: वायरल पॉडकास्ट और पहुंच का दावा इस वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज न केवल हमले को स्वीकार करते दिख रहे हैं, बल्कि उनका यह दावा भी आग में घी डालने का काम कर रहा है कि अपनी राजनीतिक पहुंच के कारण वह बिना किसी सजा के बच निकले। इस बयान के बाद CJP के नेता और कार्यकर्ता भड़क गए हैं। पार्टी ने सीधे तौर पर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है।

पुलिस के खिलाफ CJP का हल्ला बोल सौरव दास और आशुतोष रांका समेत CJP के कई नेताओं ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि भारद्वाज ने जिस बर्बरता का जिक्र किया, उसके बाद भी वह खुलेआम घूम रहे हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस का सफाई देते हुए कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट में चोटें ज्यादा गंभीर नहीं थीं। पुलिस ने अब वायरल पॉडकास्ट को भी जांच का आधार बनाया है और FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं भी शामिल की गई हैं।

क्यों मांग की जा रही है 307 और 326 जैसी कड़ी धाराओं की? CJP का तर्क है कि हमले की गंभीरता को देखते हुए सामान्य धाराओं के बजाय हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाने वाली धाराएं लगनी चाहिए। कानूनी तौर पर देखें तो:

पीड़ित पक्ष का कहना है कि हमले में जो चोटें आई हैं, वे साधारण नहीं हैं, इसलिए पुलिस को आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इन धाराओं को जोड़ना चाहिए।

जातिगत पहलू और SC/ST एक्ट की मांग CJP ने इस मामले को जातिगत नफरत से भी जोड़ दिया है। उनका कहना है कि घायल संजय कुमार दलित समुदाय से हैं, इसलिए इस हमले में जातिगत पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर SC/ST एक्ट लगाने की मांग की गई है।

अब आगे क्या? एक तरफ आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज इसे आत्मरक्षा (Self-defence) करार दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ पॉडकास्ट में दिया गया उनका बयान अब उनके लिए गले की फांस बनता दिख रहा है। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि वे कानून और मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर ही जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। फिलहाल, यह मामला अब केवल एक मारपीट का केस न रहकर एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक बहस में तब्दील हो चुका है।

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