दिल्ली AIIMS में 13 साल का इंतज़ार और एक मासूम की मौत: क्या इलाज में हुई लापरवाही?
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दिल्ली: देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, दिल्ली एम्स (AIIMS) में 15 साल की एक किशोरी तन्वी की मौत ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तन्वी के परिवार का आरोप है कि 13 वर्षों तक अस्पताल के चक्कर काटने के बावजूद डॉक्टरों ने उनकी बेटी की सही समय पर सर्जरी नहीं की, जिसके चलते उन्होंने अपनी बच्ची को खो दिया।

13 साल का संघर्ष और टालमटोल

राजस्थान के कोटा निवासी मुकेश परियानी और उनकी पत्नी भाविका के लिए यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है। साल 2012 में जब तन्वी को दिल की बीमारी का पता चला, तो परिवार उम्मीद के साथ एम्स दिल्ली पहुंचा। पिता के अनुसार, 2014 में सर्जरी के लिए पैसे और खून तक जमा कराए गए, लेकिन ऑपरेशन की तारीख को बार-बार आगे बढ़ाया गया।

शिकायत पर भी नहीं पसीजा सिस्टम

पीड़ित पिता का आरोप है कि जब उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत की, तो इसका खामियाजा उनकी बेटी को भुगतना पड़ा। उनका दावा है कि डॉक्टरों ने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और ऐसा न करने पर ऑपरेशन से इनकार कर दिया। सालों तक केवल टेस्ट के नाम पर उन्हें अस्पताल के चक्कर कटवाए गए।

अस्पताल प्रशासन ने बिठाई जांच समिति

तन्वी की दुखद मौत के बाद मचे बवाल के बाद एम्स प्रशासन हरकत में आया है। संस्थान के निदेशक ने मामले का संज्ञान लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति तन्वी के इलाज के दौरान हुई देरी और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पीड़ित पिता की मांग: FIR और नार्को टेस्ट

अपनी जवान बेटी को खोने के बाद पिता मुकेश परियानी ने अब न्याय की जंग छेड़ दी है। उन्होंने इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की है। इतना ही नहीं, उन्होंने इस मामले में शामिल जिम्मेदारों का सच सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट की भी मांग की है।

परियानी ने सवाल उठाया है, अगर 2015 या 2016 में ऑपरेशन संभव था, तो उसे क्यों टाला गया? मेरी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? फिलहाल, यह मामला न केवल एम्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ी बहस छिड़ गई है।

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