क्या भारत बनेगा शांतिदूत ? मोदी-जयशंकर की सक्रियता से रूस-यूक्रेन युद्ध में सुलह की उम्मीद
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध को खत्म करने के लिए भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी मोर्चा संभाल लिया है। वैश्विक स्तर पर भारत की इस सक्रियता से युद्ध के खात्मे की नई उम्मीदें जगी हैं।

कीव में जयशंकर और जेलेंस्की की अहम बैठक

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव पहुंचकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने युद्ध को समाप्त करने के तरीकों और आपसी संबंधों को मजबूत करने पर गहराई से चर्चा की। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत इस संघर्ष को खत्म कराने में हर संभव मदद देने और मध्यस्थता करने के लिए तैयार है।

युद्ध के खिलाफ भारत का स्पष्ट रुख

जेलेंस्की ने भारत के इस रुख का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन रूस द्वारा थोपे गए इस अन्यायपूर्ण युद्ध को समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता का आभारी है। भारत का संदेश साफ है—यह युग युद्ध का नहीं है, मानवता की भलाई के लिए शांति की ओर बढ़ना ही एकमात्र विकल्प है।

मोदी की पुतिन से सीधी अपील

इससे पहले बिश्केक में आयोजित 26वें SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। पीएम मोदी ने पुतिन से दो टूक शब्दों में कहा था कि युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है। उन्होंने शांति का आह्वान करते हुए कहा कि मुद्दों का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि बातचीत से ही निकल सकता है।

क्या भारत करा पाएगा सुलह?

रूस और यूक्रेन, दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ भारत के लगातार संवाद ने नई राजनयिक संभावनाएं खोल दी हैं। जहां एक ओर दुनिया के कई देश इस युद्ध पर बंटे हुए हैं, वहीं भारत तटस्थ मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत अपनी इस कूटनीति में सफल रहता है, तो यह वैश्विक शांति के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत की यह पहल दोनों देशों को वार्ता की मेज पर लाने में कामयाब हो पाएगी।

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