यासीन मलिक का चौंकाने वाला कदम: सरला भट्ट केस में मांगी फांसी, पत्नी को दिया तलाक
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तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने एक ऐसा बयान दाखिल किया है जिसने कानूनी और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। 1990 के चर्चित कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में मलिक ने खुद को अदालत के सामने पेश करने और कानूनी बचाव करने से इनकार कर दिया है।

फांसी की मांग और कानूनी रुख

मलिक ने श्रीनगर की कोर्ट में 25 पन्नों का लिखित हलफनामा दाखिल किया है। इसमें उसने स्पष्ट कहा है कि वह सरला भट्ट मामले में अपना बचाव नहीं करेगा और अदालत उसके लिए सीधे तौर पर मृत्युदंड यानी फांसी पर विचार करे। हालांकि, मलिक ने यह भी जोड़ा है कि इसे जुर्म कुबूलना न माना जाए। उसका दावा है कि उसे राजनीतिक कारणों से इस केस में फंसाया गया है।

1990 की हत्या और केस का इतिहास

सरला भट्ट श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में नर्स थीं। अप्रैल 1990 में उनका अपहरण कर बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी। तीन दशक तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद यह मामला स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) द्वारा फिर से खोला गया। 2026 में दाखिल चार्जशीट में यासीन मलिक को प्रमुख आरोपी बनाया गया है।

16 साल की शादी का अंत

मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से भी रिश्ता खत्म करने का ऐलान कर दिया है। मलिक का तर्क है कि पिछले आठ सालों से वह अपने परिवार से ठीक से संपर्क नहीं कर पाया है। उसने कहा कि वह नहीं चाहता कि मुशाल उसकी परिस्थितियों का बोझ उठाकर जीवन भर विधवा जैसा जीवन जिए। उसने मुशाल से नई जिंदगी शुरू करने की अपील की है।

बेटी रजिया के लिए भावुक अपील

अपने हलफनामे में मलिक ने अपनी बेटी रजिया सुल्ताना के लिए भी एक मार्मिक संदेश लिखा है। उसने बेटी से अपनी दादी (मलिक की मां) का ख्याल रखने और उनसे नियमित बात करने का आग्रह किया है। उसने अपने परिवार से दूर रहने के मजबूर हालात पर दुख भी व्यक्त किया।

आगे क्या होगा?

यासीन मलिक का यह रुख नया नहीं है; 2022 के टेरर फंडिंग मामले में भी उसने मुकदमे का विरोध नहीं किया था, जिसके बाद उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अब सरला भट्ट हत्याकांड में उसकी फांसी की मांग और बचाव न करने के फैसले के बाद 19 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह स्पष्ट है कि मलिक की मांग के बावजूद अंतिम फैसला पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों पर आधारित होगा।

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