देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के ताजा आंकड़ों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार द्वारा जारी जीडीपी आंकड़ों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार से चार सीधे और गंभीर सवाल पूछे हैं। कांग्रेस का दावा है कि आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
43 लाख करोड़ का गायब होना बड़ा सवाल कांग्रेस का मुख्य आरोप है कि पिछले चार वर्षों के जीडीपी अनुमानों को बड़े पैमाने पर नीचे की ओर संशोधित किया गया है। जयराम रमेश के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था के अनुमानित आकार में कुल 43 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। पार्टी ने पूछा है कि आखिर इतनी बड़ी कटौती क्यों की गई और इसके पीछे का स्पष्टीकरण क्या है?
नई कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि जीडीपी की नई कार्यप्रणाली (Methodology) को सार्वजनिक किया जाए। रमेश ने पूछा है कि इस नई पद्धति को तैयार करने के लिए किन विशेषज्ञों और संस्थाओं से परामर्श लिया गया? साथ ही, इसके विभिन्न घटकों (components) को चुनने का आधार क्या था? पार्टी का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
क्या आंकड़ों की बाजीगरी हो रही है? पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बयानों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि अगर पुराने बेस ईयर के आंकड़ों को बरकरार रखा जाता, तो नाममात्र (nominal) वृद्धि महज 2.6 प्रतिशत होती, जबकि सरकार दावा कर रही है कि यह 10.3 प्रतिशत है। कांग्रेस का आरोप है कि बेस ईयर के आंकड़ों में बार-बार संशोधन करके वृद्धि दर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है।
महंगाई दर पर भी सरकार को घेरा पार्टी ने जीडीपी डिफ्लेटर (GDP Deflator) को लेकर भी सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी डिफ्लेटर लगभग 2.5 प्रतिशत रहा, जो वास्तविक महंगाई के आंकड़ों से मेल नहीं खाता है। पार्टी का आरोप है कि इस पद्धति का इस्तेमाल वास्तविक जीडीपी गणना में महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए किया जा रहा है।
अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर चिंता कांग्रेस ने मैन्युफैक्चरिंग और प्राइवेट कंजप्शन में भारी गिरावट पर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और अर्थशास्त्रियों ने भी पहले जीडीपी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में सरकार को अपनी साख बचाने के लिए आंकड़ों में किए गए बड़े बदलावों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए।
हाल ही में जारी GDP आंकड़ों में अनियमितताओं के बढ़ते सबूतों पर हमारा बयान। मोदी सरकार को 4 सीधे सवालों के जवाब देने चाहिए। pic.twitter.com/UkIfrTjD40
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 3, 2026
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